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11 जनवरी, 2021|4:09|IST

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कुंभ संक्रांति : सूर्यदेव की करें आराधना, गोमाता का करें दान

सूर्यदेव के एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करने को संक्रांति कहा जाता है। फाल्गुन मास में आने वाली कुंभ संक्रांति का विशेष महत्व है। सूर्य की स्थिति की वजह से यह दिन हर साल बदलता है। मान्यता है कि इस दिन देवताओं का पवित्र नदियों में वास होता है। कहा जाता है कि इस दिन सभी देवी-देवता नदी में स्नान करते हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्व माना जाता है।

प्रत्येक 12 साल में कुंभ संक्रांति के अवसर पर ही विश्व के सबसे बड़े मेले कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। महान प्रतापी राजा हर्षवर्धन के शासन काल में कुंभ संक्रांति का उल्लेख मिलता है। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कुंभ संक्रांति पर गोदान और अन्न दान का विशेष महत्व है। इस दिन लोग गोमाता को चारा खिलाकर भी पुण्‍य अर्जित करते हैं। माना जाता है कि इस दिन गोदान से सुख और वैभव की प्राप्ति होती है। कुंभ संक्रांति पर ब्रह्ममुहूर्त में उठकर सूर्यदेव की उपासना करें। उन्हें अर्घ्य दें। आदित्य ह्रदय स्रोत का पाठ करें। इस दिन सूर्यदेव की आराधना करने से घर-परिवार में किसी भी सदस्य के ऊपर कोई मुसीबत या रोग नहीं आता है। परिवार के मान-सम्मान में वृद्धि होती है। इस दिन सुख-समृद्धि पाने के लिए मां गंगा का ध्‍यान करें। इस दिन गंगा स्नान अवश्य करना चाहिए। मान्यता है कि कुंभ संक्रांति पर दान करने से दोगुने पुण्य की प्राप्ति होती है।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।