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कुंभ मेला 2019: बहुत निराली है पंडों की भाषा और अर्थशास्त्र

kumbh 2019

संगम में मेला बसाने के लिए राजाओं ने दिल खोलकर दान दिया। यहां तक कि तीर्थ पुरोहितों के संकटकाल में रीवा नरेश ने जीविकोपार्जन के लिए 12 गांव दिए थे। कहा जाता है कि अकबर ने तीर्थ पुरोहित चंद्रभान, किशनराम-जयराम पंडा को 250 बीघा जमीन मेला बसाने के लिए मुफ्त में दे दी थी। 

पंडों की अपनी एक खास संस्कृति, संस्कार और बोलचाल है। इनकी सांकेतिक भाषा रोचक और व्यंजनापूर्ण भी होती है। इनका यजमानों के बीच अर्थशास्त्र का स्वरूप भी बहुत निराला है, वे एक रुपए को ‘सांगरैया', दो को ‘जऊर', तीन को ‘रक या सिंघाड़ा', चार को ‘थोक', पांच को ‘हाथू', छह को ‘डेड़मण्डा', सात को ‘हाथू जउर', आठ को ‘जउर खिस', आठ को ‘सांग खिस' और दस रुपये को ‘सलाय' कहते हैं। 

पेशवाई के मेला क्षेत्र में पहंुचने पर मेला प्रशासन ने स्वागत किया। त्रिवेणी बांध पर मेला अधिकारी विजय किरण आनंद और दूसरे अधिकारियों ने स्वागत किया। अफसरों की टीम ने संतों से सफल कुम्भ मेले के लिए आशीर्वाद मांगा। 

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  • Web Title:kumbh mela allahabad 2019: Pandit Language and Economics are Very Unique in prayagraj kumbh