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Kumbh 2019: भगवान राम का तीर्थ पुरोहित था ‘मिश्र परिवार, सदियों पुरानी है प्रयागराज के पुरोहितों की परंपरा

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कुम्भ मेले में आए लाखों श्रद्धालुओं के आवभगत करने की पंरपरा प्रयागराज के सैकड़ों तीर्थ पुरोहित निभाते हैं। इनकी परंपरा जितनी पुरानी है उससे ज्यादा अनूठी। विस्तार इतना ज्यादा जिसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। व्यस्थाओं में परिवर्तन जरूर हुआ लेकिन परंपराएं आज भी कायम हैं। तीर्थराज प्रयाग के पंडों को ‘प्रयागवाल' और ‘गंगापुत्र' के नाम से भी जाना जाता है 

भगवान राम का तीर्थ पुरोहित था ‘मिश्र परिवार' : रामायण और महाभारत काल में भी तीर्थ पुरोहितों की समृद्ध परंपरा रही है। समय के साथ पीढ़ी दर पीढ़ी इसका विस्तार होता गया।

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माना जाता है कि त्रेतायुग में भगवान राम के तीर्थ पुरोहित चौखंडी बारह खंभा के रहने वाले मिश्र परिवार के पूर्वज थे। प्रभु राम ने जिस स्थान पर गंगा स्नान किए थो वह रामघाट के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसीलिए देवोत्थान एकादशी के दिन प्रयागवाल सभा की ओर से हर साल उत्सव की तरह प्रभु राम की यात्रा निकाली जाती है। डॉ. शंभुनाथ त्रिपाठी ‘अंशुल' ने बताया कि लौकिक परंपरा के अनुसार भगवान राम की वंश परंपरा से जुड़े अधिकांश पुरोहित कीड़गंज चौखंडी और दारागंज में रहते थे। इसमें माधौराज वैद्य, लाल वीरेन्द्र शर्मा आदि थे।
 

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  • Web Title:Kumbh 2019: Lord Rama Tirtha Purohit was mishra family centuries old tradition of priests of Prayagraj