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जानिए क्या है सिंदूरदान, क्यों बोला जाता है यह मंत्र

ज्‍योत‍िषाचार्य पं.श‍िवकुमार शर्मा,मेरठ Praveen
Sun, 28 Nov 2021 10:18 PM
जानिए क्या है सिंदूरदान, क्यों बोला जाता है यह मंत्र

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हिंदू विवाह व्यवस्था एक आदर्श वैदिक परंपरा है। इस परंपरा का निर्वहन करते हुए हमारी संस्कृति में विवाह संस्कार में बहुत से ऐसे संस्कारों शामिल हैं जो पूरे जीवनभर पति-पत्नी के संबंधों को अक्षुण्ण बनाए रखते हैं। इसी में से एक है विवाह के समय सिंदूरदान अथवा मांग भरना। विवाह संस्कार में अग्नि परिक्रमा के पश्चात सप्तपदी होती है। सप्तपदी संस्कार तक कन्या वर के दाहिने अंग में बैठती है, किंतु सप्तपदी के पश्चात उन्हें बाएं अंग में बैठा कर वर सिंदूर से वधू की सिन्दूर से मांग भरता है। इसे वैदिक भाषा में सिंदूरदान कहते हैं। सिंदूरदान के समय यह मंत्र बोला जाता है। ’ॐ सुमंगलीरियं वधूरिमां समेत पश्यत। सौभाग्यमस्यै दत्त्वा याथास्तं विपरेतन।।’ इस मंत्र का भाव यह है कि वर कहता है कि विवाह मंडप में आए हुए सभी भद्र पुरुष एवं महिलाएं, आपके समक्ष मैं वधू की मांग भर रहा हूं। आप इस वधू के सुमंगली (कल्याणकारी) होते हुए देखो और हमें सौभाग्य और समृद्धि का वरदान देकर कृतार्थ करें। हे वरानने (वधू ) तू सुमंगली (कल्याणकारी) है। मैं  तेरा सुमंगल होते हुए देख रहा हूं। तुम्हारे सौभाग्य को बढ़ाने वाले इस सिंदूर को तुमको दान करके मैं अपना कर्तव्य पूर्ण कर रहा हूं जो तुम्हारी विपरीत स्थितियों में भी रक्षा करेगा।

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 सिंदूरदान भारतीय हिंदू परंपरा का सर्वश्रेष्ठ संस्कार है। इसका अर्थ यह है कि विवाह से पूर्व कन्या अपने पिता के घर रहकर श्रृंगार नहीं कर सकती थी, किंतु विवाह के इस सिन्दूर दान के पश्चात वर अपनी वधू को अधिकार देता है। अब तू मेरी वामांगी हो गई हो और तुम्हारी रक्षा करना मेरा धर्म है और अब मैं तुम्हें अपने पिता के यहां रहते हुए श्रृंगार न करने के कर्तव्य को समाप्त कर सोलह श्रृगार करने की अनुमति प्रदान करता हूं। शास्त्रों में यह कहा गया है कि पत्नी सोलह श्रृगार अपने पति को प्रिय लगने के लिए करती है और पति प्रिया पत्नी सदैव सुख पाती है। मांग भरते समय वर अपनी अंगूठी अथवा चांदी के छल्ले के द्वारा अंगुली में सिंदूर लेकर के तीन बार कन्या की मांग में सिंदूर डालते हैं।  इसका अर्थ यह है कि तीन वचनों की परंपराएं जीवन भर निभानी होती है। प्रथम तो यह कि वह जो श्रृंगार करेगी पति के निमित्त करेगी। दूसरे उसे श्रृंगार करने से शरीर को स्वस्थ और पल्लवित रखने का एक आभास होगा। तीसरे मांग भरने से पति की आयु लंबी होती है। शास्त्रों में कहा गया है जो महिला सदैव अपने सिर के बीचोबीच मांग में सिंदूर भरकर रखती है उनका पति कभी काल कवलित नहीं होता। यह मां सीता का वरदान है।
(ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।) 

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