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21 जनवरी, 2020|2:03|IST

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महाभारत के युद्ध के दौरान इस व्यक्ति ने 18 दिनों तक की थी 50 लाख योद्धाओं के खाने की व्यवस्था

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महाभारत के युद्ध को ब्रह्मांड का सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है। ऐसे में युद्ध से जुड़ी कई छोटी बातों के बारे में हम कई बार सोचते हैं। जैसे, युद्ध के नियम अनुसार जब सभी योद्धा रात्रि शिविर में विश्राम करते थे, तो उनके लिए भोजन का प्रबंध कौन करता होगा। महाभारत में इस बात का भी उल्लेख मिलता है।  जिसके अनुसार उडुपी नरेश ने 50 लाख से ज्यादा सैनिकों के खाने की व्यवस्था की थी। 


उडुपी नरेश ने श्रीकृष्ण  को दिया प्रस्ताव
कौरव और पांडव के प्रतिनिधि प्रतापी उडुपी नरेश को अपनी अपनी ओर से युद्ध लड़ने के लिए मनाने लगे। दोनों पक्षों की बातें सुनकर उडुपी नरेश तय नहीं कर पाए कि वह किसकी ओर से युद्ध लड़ें और उन्हेंं वहां मौजूद आर्यावर्त की समस्ती सेना के भोजन की चिंता सताने लगी। उडुपी नरेश पांडवों के शिविर में पहुंचे और श्रीकृष्ण से मिले। उडुपी नरेश ने श्रीकृष्ण से कहा कि ‘भाईयों के बीच हो रहे इस युद्ध के वह समर्थक नहीं हैं लेकिन अब इसे टाला नहीं जा सकता है, लिहाजा वह इसमें वह शस्त्रों के माध्यम से  भाग नहीं लेना चाहते हैं। लेकिन, वह इस महायुद्ध में शामिल जरूर होना चाहते हैं।‘


50 लाख से ज्याादा सैनिकों के लिए भोजन
श्रीकृष्णा उडुपी नरेश का प्रयोजन समझ गए और उनसे पूछा कि आप क्या चाहते हैं। इस पर उडुपी नरेश ने दोनों ओर के सैनिकों के भोजन का प्रबंध करने का प्रस्ताव रखा। इस पर श्रीकृष्ण  मान गए और उडुपी नरेश ने अपनी सेना के साथ बिना शस्त्रों के युद्ध में भाग लिया। उडुपी नरेश ने दोनों ओर के सैनिकों के लिए 18 दिन तक रोजाना भोजन उपलब्ध कराया। युधिष्ठिर ने राजतिलक समारोह के दौरान उडुपी नरेश की प्रशंसा करते हुए उन्हें बिना शस्त्र  के युद्ध लड़ने वाले राजा के नाम से सुशोभित किया।

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  • Web Title:king of udupi manage food during battle of mahabharat