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2023 के राजा-मंत्री शनि, जानिए कैसा रहेगा साल

वर्ष 2023 के राजा और मन्त्री शनिदेव रहेंगे। ग्रह गोचर में शनि देव कुंभ राशि पर विचरण करेंगे। भारत में स्वतंत्रता की जन्म कुंडली के अनुसार वृषभ लग्न में राहु विराजमान हैं। कर्क राशि में शनि देव पराक्रम

2023 के राजा-मंत्री शनि, जानिए कैसा रहेगा साल
Praveenज्‍योत‍िषाचार्य पं.श‍िवकुमार शर्मा,मेरठThu, 29 Dec 2022 08:43 PM

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वर्ष 2023 के राजा और मन्त्री शनिदेव रहेंगे। ग्रह गोचर में शनि देव कुंभ राशि पर विचरण करेंगे। भारत में स्वतंत्रता की जन्म कुंडली के अनुसार वृषभ लग्न में राहु विराजमान हैं। कर्क राशि में शनि देव पराक्रम भाव में बैठे हुए हैं और वर्ष 2023 में शनिदेव शुक्र के साथ पंचम भाव में विराजमान हैं। लग्नेश  बुध राहु के नक्षत्र में विचरण कर रहे हैं। इस विवेचना के अनुसार यह वर्ष भारत के लिए चुनौतियों से भरा हुआ रहेगा। यद्यपि राजनीतिक सूझबूझ से अधिकतर समस्याओं का समाधान हो जाएगा। विश्व और भारत में हिंसा का दौर शुरू होने के योग बन रहे हैं। एक-देश दूसरे देश को नीचे दिखाने के लिए कुटिल चाल चलेंगे। इन विषम परिस्थितियों में भारत सबको अपना मार्गदर्शन करेगा। भारत की नीतियों के कारण विश्व में उसकी प्रशंसा होगी। किसी राजनेता अथवा किसी मंत्री का आकस्मिक अवसान होने के योग भी हैं। 

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खेती-बाड़ी फसल के लिए 2023 बहुत अच्छा है। समय अनुसार वर्षा होगी। हालांकि प्राकृतिक विषमताएं बनी रहेंगी। भू- स्खलन, अतिवृष्टि ,भूकंप, चक्रवात एवं वज्रपात की घटनाएं बढ़ेंगी। वर्ष कुंडली के अनुसार बृहस्पति अपनी राशि में सप्तम भाव में, शनिदेव अपनी स्वराशि में पंचम भाव में और मंगल भाग्य भाव में  विराजमान हैं। इसके परिणाम स्वरूप वर्ष कुंडली बहुत ही शुभ है। भारत के विदेश नीति की सराहना पूरा विश्व करेगा। विश्व में भारत का बहुत ही बड़ा योगदान होगा। 2023 में भारत में कोरोना महामारी भयावह नहीं होगी, किंतु सावधानी अवश्य बरती जानी चाहिए। मौसमी बीमारियों से भी जनधन की हानि के संकेत हैं। आतंक, चोरी, डकैती, अपहरण एवं बलात्कार की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है। वैज्ञानिक क्षेत्र में भारत के नई उपलब्धियां हासिल करेगा।  बुध के दुषप्रभाव से अंतरिक्ष में विस्मयकारी घटनाएं घट सकती हैं। वृश्चिक राशि के मंगल होने से विश्व में रेल दुर्घटना, हवाई दुर्घटना और सड़क दुर्घटना के योग बन रहे हैं। बृहस्पति अपनी राशि में होने से भारत सनातन संस्कृति की ओर अग्रसर होता रहेगा। संविधान में भी कुछ बड़े परिवर्तन होने के योग भी बन रहे हैं। आध्यात्मिक श्रेणी के लोगों का प्रभुत्व और वर्चस्व पूरे विश्व में बढ़ेगा। शिक्षा,खेल और योग के क्षेत्र में भारत का कीर्तिमान बना रहेगा।
(ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।) 
 

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