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18 जनवरी, 2020|9:05|IST

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16 दिसंबर से शुरु हो रहे हैं खरमास, जानें क्या है इससे जुड़ी पौराणिक कथा

kharmas 2019

Kharmas 2019: हिंदू पंचांग के अनुसार कल यानी  सोमवार, 16 दिसंबर से मलमास या खरमास शुरू हो रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह कोई भी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण संस्कार, यज्ञोपवीत संस्कार, वधु प्रवेश, गृह निर्माण, नए व्यापार का शुभारंभ आदि करना वर्जित माना जाता है।

सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने पर खरमास माह शुरू होता है। जो कि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के बाद समाप्त होता है। बता दें, 15 जनवरी 2020 को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के बाद मकर संक्रांति के ही दिन खरमास का माह समाप्त होगा। हिंदू धर्म में खरमास या मलमास में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए । आइए जानते हैं खरमास या मलमास के पीछे जुड़ी क्या है पौराणिक कथा।

खरमास की पौराणिक मान्यता-
लोक कथाओं के अनुसार खरमास को अशुभ माह मानने के पीछे एक पौराणिक कथा बताई जाती है। खर गधे को कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मार्कण्डेय पुराण के अनुसार एक बार सूर्य अपने सात घोड़ों के राथ को लेकर ब्राह्मांड की परिक्रमा करने के लिए निकल पड़ते हैं।

इस परिक्रमा के दौरान सूर्य देव को रास्ते में कहीं भी रूकने की मनाही होती है, लेकिन सूर्य देव के सातों घोड़े कई साल निरंतर दौड़ने की वजह से जब प्यास से व्याकुल हो जाते हैं तो सूर्य देव उन्हें पानी पिलाने के लिए निकट बने एक तलाब के पास रूक जाते हैं। तभी उन्हें स्मरण होता है कि उन्हें तो रास्ते में कहीं रूकना ही नहीं है तो वो कुंड के पास कुछ गधों को अपने रथ से जोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। जिससे उनकी गति धीमी हो जाती है। यही वजह है कि खरमास को अशुभ माह के रूप में देखा जाता है। 

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  • Web Title:kharmas 2019: According to hindu religion Know the starting date of kharmas or Malmas mythological or pauranik katha