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मायापुरी कहलाती थी यह पावन नगरी, यहां उमड़ता है कांवड़ियों का सैलाब

कांवड़ यात्रा आरंभ हो चुकी है और कांवड़िये हरिद्वार की ओर रवाना होने लगे हैं। कांवड़ यात्रा में शिवभक्त हरिद्वार और गोमुख से गंगाजल लाकर भगवान आशुतोष का अभिषेक करते हैं। हरिद्वार सात पवित्र धार्मिक स्थानों में से एक माना जाता है। हरिद्वार को देवताओं तक पहुंचने का प्रवेशद्वार माना जाता है। यही वह स्थान है जहां पर्वतों से उतरकर मां गंगा का तराई क्षेत्र में अवतरण होता है। हरिद्वार को दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक माना जाता है।

हरिद्वार का प्राचीन नाम मायापुरी है। मान्यता है कि समुद्र मंथन में अमृत की कुछ बूंदे हरिद्वार में गिरी थी। इसी कारण यहां कुम्भ मेला आयोजित होता है। हरिद्वार में ही भगवान ब्रह्मा ने विशाल यज्ञ किया था। हरिद्वार के हर घाट के साथ कोई न कोई कथा जुड़ी हुई है। यहां हर की पैड़ी को ब्रह्मकुंड भी कहा जाता है। यहां राजा श्वेत ने भगवान ब्रह्मा की तपस्या की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान ने वर मांगने को कहा तो राजा ने कहा कि इस स्थान पर भगवान विष्णु तथा महेश एक साथ निवास करें। यहां सभी तीर्थों का वास हो। हरिद्वार भगवान शिव और भगवान विष्णु की भूमि है, इसलिए इसे देवभूमि भी कहा जाता है। मान्यता है कि हर की पैड़ी पर गंगा स्नान करने से पुनर्जन्म नहीं होता। यहां स्थित चंडी देवी मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है। हरिद्वार में स्थित दक्ष प्रजापति मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां राजा दक्ष ने उस यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें माता सती ने खुद को भस्म कर लिया था। यज्ञ की जिस अग्नि में माता सती ने खुद का दाह कर लिया था, वह अग्नि आज भी प्रज्जवलित है।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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  • Web Title:Kanvad Yatra
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