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हिंदी न्यूज़ धर्मKaal Bhairav Jayanti Aarti : काल भैरव जयंती पर करें ये आरती

Kaal Bhairav Jayanti Aarti : काल भैरव जयंती पर करें ये आरती

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीYogesh Joshi
Sat, 27 Nov 2021 06:41 AM
Kaal Bhairav Jayanti Aarti : काल भैरव जयंती पर करें ये आरती

मार्गशीर्ष माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर काल भैरव जयंती मनाई जाती है। काल भैरव भगवान शिव के ही अवतार हैं। इस पावन दिन विधि- विधान से भगवान काल भैरव के साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा- अर्चना भी करनी चाहिए। काल भैरव जयंती के दिन ये आरती जरूर करें-

सबसे पहले भगवान गणेश की आरती करें- किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा- अर्चना की जाती है।

भगवान गणेश की आरती-

 

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी। 
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा।। ..
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया। 
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।। 
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा .. 
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा। 

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी। 
कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी।

 

भैरव जी की आरती-

 

  • आरती श्री भैरव बाबा की

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा।
जय काली और गौरा देवी कृत सेवा।।
 
तुम्हीं पाप उद्धारक दुख सिंधु तारक।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक।।
 
वाहन शवन विराजत कर त्रिशूल धारी।
महिमा अमिट तुम्हारी जय जय भयकारी।।
 
तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होंवे।
चौमुख दीपक दर्शन दुख सगरे खोंवे।।
 
तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी।
कृपा करिए भैरव करिए नहीं देरी।।
 
पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू डमकावत।।
बटुकनाथ बन बालक जन मन हर्षावत।।
 
बटुकनाथ जी की आरती जो कोई नर गावें।
कहें धरणीधर नर मनवांछित फल पावें।।

 

भगवान शिव की आरती-

 

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

 

माता पार्वती की आरती-

 

जय पार्वती माता जय पार्वती माता
 
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
 
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता
 
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता।


 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
 
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा

 
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा।
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
 
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता
 
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
 
शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता
 
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
 
सृष्ट‍ि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता
 
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
 
देवन अरज करत हम चित को लाता
 
गावत दे दे ताली मन में रंगराता।
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
 
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता
 
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।
 
जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।

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