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हिंदी न्यूज़ धर्मKaal Bhairav Jayanti : काल भैरव जयंती पर जरूर करें ये आरती, सुनो जी भैरव लाडले, कर जोड़ कर विनती करूं...

Kaal Bhairav Jayanti : काल भैरव जयंती पर जरूर करें ये आरती, सुनो जी भैरव लाडले, कर जोड़ कर विनती करूं...

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीYogesh Joshi
Sat, 27 Nov 2021 06:40 AM
Kaal Bhairav Jayanti : काल भैरव जयंती पर जरूर करें ये आरती, सुनो जी भैरव लाडले, कर जोड़ कर विनती करूं...

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Kaal Bhairav Jayanti : हर साल मार्गशीर्ष माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव जयंती मनाई जाती है। इसी दिन भगवान शिव के रौद्र अवतार काल भैरव का अवतरण हुआ था। काल भैरव जयंती के दिन विधि- विधान से भैरव बाबा की अराधना करने से दुख- दर्द दूर होते हैं और भय से मुक्ति मिलती है। भगवान की आरती करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस पावन दिन भैरव बाबा की आरती जरूर करें।

  • आरती श्री भैरव बाबा की


सुनो जी भैरव लाडले, कर जोड़ कर विनती करूं
कृपा तुम्हारी चाहिए , में ध्यान तुम्हारा ही धरूं

मैं चरण छूता आपके, अर्जी मेरी सुन सुन लीजिए
मैं हूँ मति का मंद, मेरी कुछ मदद तो कीजिए

महिमा तुम्हारी बहुत, कुछ थोड़ी सी मैं वर्णन करूं
सुनो जी भैरव लाडले...

करते सवारी श्वानकी, चारों दिशा में राज्य है
जितने भूत और प्रेत, सबके आप ही सरताज हैं |
हथियार है जो आपके, उनका क्या वर्णन करूं
सुनो जी भैरव लाडले...

माताजी के सामने तुम, नृत्य भी करते हो सदा
गा गा के गुण अनुवाद से, उनको रिझाते हो सदा
एक सांकली है आपकी तारीफ़ उसकी क्या करूँ
सुनो जी भैरव लाडले...

बहुत सी महिमा तुम्हारी, मेहंदीपुर सरनाम है
आते जगत के यात्री बजरंग का स्थान है
श्री प्रेतराज सरकारके, मैं शीश चरणों मैं धरूं
सुनो जी भैरव लाडले...

निशदिन तुम्हारे खेल से, माताजी खुश होती रहें
सर पर तुम्हारे हाथ रखकर आशीर्वाद देती रहे

कर जोड़ कर विनती करूं अरुशीश चरणों में धरूं
सुनो जी भैरव लाड़ले, कर जोड़ कर विनती करूं
 

  • आरती श्री भैरव बाबा की

 

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैंरव देवा।
जय काली और गौरा देवी कृत सेवा।।
 
तुम्हीं पाप उद्धारक दुख सिंधु तारक।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक।।
 
वाहन शवन विराजत कर त्रिशूल धारी।
महिमा अमिट तुम्हारी जय जय भयकारी।।
 
तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होंवे।
चौमुख दीपक दर्शन दुख सगरे खोंवे।।
 
तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी।
कृपा करिए भैरव करिए नहीं देरी।।
 
पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू डमकावत।।
बटुकनाथ बन बालक जन मन हर्षावत।।
 
बटुकनाथ जी की आरती जो कोई नर गावें।
कहें धरणीधर नर मनवांछित फल पावें।।

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