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5 सितम्बर, 2020|9:21|IST

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Janmashtami 2020: घर-घर विराजेंगे लड्डू-गोपाल, आज सुबह 9:06 शुरू अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र का नहीं संयोग, 11 और 12 दोनों दिन जन्माष्टमी

भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में सभी रम गए हैं। 12 अगस्त को अष्टमी तिथि सूर्योदयकाल से शुरू होकर दिन में 11:16 मिनट तक ही रहेगी। 11 और 12 अगस्त दोनों ही दिन अष्टमी तिथि के चलते जन्माष्टमी का व्रत और पर्व मनाया जाएगा। हालांकि, मध्यरात्रि के समय अष्टमी तिथि केवल 11 तारीख को ही उपस्थित रहेगी, इसलिए इस दिन जन्माष्टमी व्रत का विशेष महत्व रहेगा।  ज्योतिषाचार्य विभोर इंदुसुत कहते हैं कि इस बार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बनेगा लेकिन 11 तारीख को उदयकालीन तिथि को सप्तमी होगी। सुबह 9:06 मिनट से ही अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। यह तिथि पूरे दिन और रात में व्रत के पारायण के समय भी उपस्थित रहेगी।12 को 11:16 के बाद होगी नवमी।

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चंद्र दर्शन के बाद करें व्रत का पारायण
जन्माष्टमी व्रत का पारायण चंद्रमा के दर्शन के बाद ही किया जाता है। इसके बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है।  इस बार 11 अगस्त को चंद्रोदय रात्रि 11:41 मिनट पर होगा। वहीं, 12 अगस्त को चंद्रोदय रात्रि 12:18 बजे होगा।

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लड्डू गोपाल को लगाएं माखन मिश्री का भोग
पंडित विनोद त्रिपाठी कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण को  मक्खन और मिश्री बेहद प्रिय हैं। ऐसे में इनका भोग विशेष लाभकारी है। ज्योतिषविद भारत ज्ञान भूषण कहते हैं कि विशेष मुहूर्त में पूजन भगवान श्री कृष्ण की विशेष अनुकंपा का योग बनाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन कृतिका नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा, इस दिन चंद्रमा मेष राशि में और सूर्य कर्क राशि में रहेगा। इसके कारण वृद्धि योग भी होगा। 12 अगस्त को पूजा का शुभ समय रात 12:05 मिनट से 12:47 मिनट तक है। पूजा की अवधि 43 मिनट तक रहेगी।

जन्माष्टमी पर विशेष पूजन व संकीर्तन मुहूर्त
लाभ अमृत मुहूर्त    सुबह 10:46 से दोपहर 2:05 तक
शुभ मुहूर्त    तीसरे पहर 3:44 से शाम 5:24 तक
लाभ मुहूर्त    रात 8:24 से रात 9:44 तक
जन्म, अभिषेक-आरती मध्य रात्रि 12:04 से 12:47 तक
 
ऐसे करें पूजा
1. चौकी में लाल वस्त्र बिछाएं और भगवान कृष्ण के बालस्वरूप को पात्र में रखें।
2. फिर लड्डू गोपाल को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं।
3. भगवान को नए वस्त्र पहनाएं।
4. अब भगवान को रोली और अक्षत से तिलक करें।
5. अब लड्डू गोपाल को माखन मिश्री का भोग लगाएं। श्रीकृष्ण को तुलसी का पत्ता भी अर्पित करें।
6. भोग के बाद श्रीकृष्ण को गंगाजल भी अर्पित करें।
7. अब हाथ जोड़कर अपने आराध्य देव का ध्यान लगाएं।

जन्माष्टमी पर विशेष
-भगवान कृष्ण (लड्डू गोपाल) के अभिषेक के लिए शाम 5:40 से 6:04 बजे के बीच गौधूलि वेला में शुभ समय होगा।
-गाय के दूध दही और माखन से करें लड्डू गोपाल का अभिषेक।
-जन्माष्टमी का व्रत चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही खोला जाता है। 11 अगस्त को जन्माष्टमी के दिन रात्रि 11:41 बजे होगा और 12 को रात 12:18 पर चंद्रोदय होगा।
-लड्डू गोपाल का पीताम्बरी (पीले वस्त्र) और मोर पंख से श्रृंगार करें।

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  • Web Title:Janmashtami 2020: Laddu-Gopal will sit at home Ashtami will start at 9 06 am today no rohini nakshatra this year read here Janmashtami vrat puja chandra darshan and paran vidhi