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Janmashtami 2019: सभी 16 कलाओं के स्वामी थे श्री कृष्ण वेद

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श्रीकृष्ण को पूर्णावतार और 16 कलाओं का स्वामी कहा गया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्रीमद्भागवत कथा वक्ता पंडित मनोज शास्त्री ने इन 16 कलाओं पर प्रकाश डाला। 

उन्होंने बताया कि सोलह कलाओं का अर्थ संपूर्ण बोधपूर्ण ज्ञान से है। प्रत्येक मनुष्य में ये 16 कलाएं सुप्त अवस्था में होती हैं।  जो व्यक्ति मन और मस्तिष्क से अलग रहकर बोध करने लगता है वहीं 16 कलाओं में गति कर सकता है। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण धन-धान्य से परिपूर्ण थे। उनके घर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता था। पृथ्वी पर राज्य करने की क्षमता, कार्यक्षमता और लीलाओं से चारों दिशाओं में विख्यात थे। 

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उनके रूप को देखकर मन अपने आप आकर्षित हो जाता है। वेदों के ज्ञाता, संगीत-नृत्य के मर्मज्ञ, युद्ध कला में पारंगत, राजनीति में माहिर थे। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा। उनमें कल्याण की प्रवृत्ति अपार थी। 

 श्री कृष्ण के गांव में जब विपदा आई तो तत्काल गांव वालों को इकट्ठा किया। इंद्र ने वर्षा की तो पहाड़ को अंगुली पर उठा लिया। श्रीकृष्ण के अंदर लोगों को जोड़ने और नेतृत्व की अपार क्षमता थी। प्रबंधन कला के गुणों के लिए वे प्रेरणा स्वरूप हैं। कालिया नाग को परास्त कर बृज की रक्षा की। प्रो. संजय मेधावी, व्यापार प्रशासन विभाग, लविवि

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  • Web Title:Janmashtami 2019: Shri Krishna Veda was the master of all 16 arts
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