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Janmashtami 2018: यमुना महारानी पखारेंगी पांव और जेल के खुल जाएंगे ताले

पूरे वर्ष यमुना की एक-एक बूंद के लिए लोग तरसते हैं। पर, यह अजब संयोग है कि जन्माष्टमी के मौके पर यमुना महारानी श्रीकृष्ण के चरण पखारने आती हैं। कभी-कभी तो यमुना का रौद्र रूप द्वापर के उस कालखंड की याद दिला देता है, जब कान्हा जन्मे थे। वासुदेव यमुना पार कर रहे थे।

तब मां यमुना कृष्ण के चरण छूने को मचल उठी थीं। वासुदेव टोकरी को जितना ऊपर उठाते यमुना उतना ही ऊपर आ जातीं। तब श्रीकृष्ण ने अपने पैर नीचे लटका दिए और यमुना चरण छूकर सिमट गईं। भादों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर यमुना आज भी पूरे वेग से बह रही हैं। लोग इसे इत्तेफाक या संयोग भी कहते हैं। यमुना किनारे के सभी घाटों पर भरपूर यमुनाजल उफन रहा है, प्रफुल्लित श्रद्धालु आचमन और स्नान करने पहुंच रहे हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पूर्व संध्या पर मथुरा के प्रयाग घाट पर यमुना का जलस्तर 164 .22 मीटर रहा, जबकि यमुना नदी में 166 मीटर पर खतरे का है। 

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द्वापर से कलयुग तक संगीनों के साए में ही जन्मते हैं कृष्ण 
द्वापर युग में पांच हजार से भी अधिक वर्षों पूर्व मथुरा के तत्कालीन राजा कंस के कारागार में माता देवकी के गर्भ से जन्म लेने वाले भगवान श्रीकृष्ण सोमवार की मध्य रात्रि एक बार फिर मथुरा में उससे भी कड़े पहरे में जन्म लेंगे। जन्माष्टमी पर मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान समेत सभी मंदिरों व उसके आसपास सुरक्षा के लिए तीन हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। ब्लैक कैट कमांडो भी तैनात होंगे।मथुरा के चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवान तैनात हैं। आमजनों को यहां आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बाकायदा आमंत्रित भी किया गया है। 

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  • Web Title:Janmashtami 2018: Yamuna Maharani will come for krishna jail door opened