DA Image
19 जनवरी, 2020|7:00|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सर्दी में भगवान ने भी धारण किए गर्म कपड़े

                                                                       -

सर्द भरी ठिठुरन से इंसान को बचने के लिए प्रशासन ने भले ही अभी कोई इंतजाम न किया हो लेकिन रूप गौड़ीय मठ में भक्तों ने परंपरा के अनुसार अपने भगवान को गर्म कपड़े पहना दिए हैं। ब्रह्म और जीव के बीच आध्यात्मिक स्तर पर अंतर भले है लेकिन लौकिक रूप में उनके आराध्य यशोदा के नंदलाल ही हैं। कान्हा की किलकारी, नटखटपन, मोहक छवि भक्तों को आत्मीयता से भर देती है। फिर अपने ‘लाल' के वात्सल्य प्रेम में उन्हें ठंड से बचने के लिए पंरपरा अनुसार इंतजाम करते हैं।

रूप गौड़ीय मठ में स्थित राधा-कृष्ण को ऊनी कपड़े, स्वेटर व कंबल पहनाया गया है। अभिषेक, पूजन व मंगला आरती के बाद भक्त मां यशोदा की तरह अपने लाल के लिए श्रद्धा भाव से स्वेटर टोपी पहनाकर पूजन-अर्चन करते हैं।

गर्म व्यंजन से भोग:भगवान को गर्म कपडे़ ही नहीं पहनाते बल्कि ठंड से बचने के लिए गर्म व्यंजनों से भोग भी लगाया जाता है। मठ में प्रमुख स्वामी अवधूत ने बताया कि यह परंपरा भगवान के प्रति वात्सल्य प्रेम का प्रतीक है। मूर्ति रूप प्रभु को मनुष्य रूप में मानकर सेवा की जाती है। प्रभु वस्तु के नहीं बल्कि भाव के भूखे हैं। मनुष्य की तरह उनकी सेवा से प्रभु अगम अगोचर नहीं रहते।

महात्माओं के चित्रों को पहनाया कपड़ा: मठ में सभागार में लगे संतों के चित्रों को भी गर्म कपड़े धारण कराए गए हैं। इसमें विष्णुपाद परमहंस परिवामक महाराज, रूप भागवत महाराज, पुरी गोस्वामी ठाकुर आदि हैं।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:In winterGod also wore warm clothes