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Hindi News AstrologyHoli stick will be fix in Dwarkadhish temple of Mathura On Magh Purnima

माघ पूर्णिमा को मथुरा केे द्वारकाधीश मंदिर में गढ़ेगा होली का डांढा , पढ़ें रंगभरी एकादशी और होलिका दहन लट्ठमार होली का पूरा शेड्यूल

Magh Purnima:24 फरवरी की पूर्णिमा को सुबह 6:00 बजे से 6:30 बजे के मध्य मथुरा द्वारकाधीश मंदिर में में होली का डांढा गढ़ेगा। इसके बाद प्रातः काल राजभोग के दर्शन में 10:00 बजे से 11:00 बजे तक होरी रसिय

माघ पूर्णिमा को मथुरा केे द्वारकाधीश मंदिर में गढ़ेगा होली का डांढा , पढ़ें रंगभरी एकादशी और होलिका दहन लट्ठमार होली का पूरा शेड्यूल
Anuradha Pandeyलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 23 Feb 2024 06:10 AM
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24 फरवरी की पूर्णिमा को सुबह 6:00 बजे से 6:30 बजे के मध्य मथुरा द्वारकाधीश मंदिर में में होली का डांढा गढ़ेगा।इसी के साथ होली के पर्व की शुरुआत होगी।  इसके बाद प्रातः काल राजभोग के दर्शन में 10:00 बजे से 11:00 बजे तक होरी रसिया गायन होगा। पुष्टिमार्ग के संप्रदाय के मंदिर ठाकुर द्वारकाधीश के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि पुष्टिमार्ग के संप्रदाय में सभी कार्यक्रम का निर्धारण मंदिर के गोस्वामी डॉ. वागिश कुमार महाराज द्वारा किया जाता है और सभी कार्यक्रम घड़ी, पल, नक्षत्र के हिसाब से होते हैं। इसलिए पूर्णिमा के दिन ही होली का डांढा गढ़ेगा। इसके पश्चात मंदिर में द्वारकेश रसिया मंडल द्वारा ब्रज के सुप्रसिद्ध रसियाओं का गायन शुरू हो जाएगा।

फुलेरा दूज से लेकर रंगभरी एकादशी और होलिका दहन तक पढ़ें पूरा शेड्यूल
बरसाने में लट्ठमार होली 12 मार्च फुलेरा दूज वाले दिन शुरू हो जाती है। इसके बाद 17 मार्च को बरसाना से नंदगांव के लोग फाग का आमंत्रण देने आएंगे। इसके बाद 18 मार्च से बरसाना में लट्ठमार होली खेली जाएगी । 20 मार्च को रंगभरी एकादशी के दिन मथुरा से लेकर द्वारकाधीश मंदिर और बांते बिहारी मंदिर में होली खेली जाएगी।  21 मार्च को गोकुल में छड़ीमार होली होगी और 24 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन होगा। 25 मार्च को रंगों से होली होगी और 27 मार्च को दाउजी का हुरंगा होगी और 2 अप्रैल तो रंगजीमंदिर में होली का उत्सव होगा।

लट्ठमार होली
भारत वर्ष में होली के उपलक्ष्य में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसी क्रम में व्रजभूमि में लट्ठमार होली 18 मार्च दिन रविवार को अपनी विशिष्ट पारंपरिक शैली के साथ हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

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