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Holi 2019: 21 मार्च को मनाई जाएगी होली, राधा-कृष्ण के अलावा ये कथाएं भी हैं प्रचलित

21 मार्च को पूरे देश में होली त्योहार मनाया जाएगा। इससे पहले 20 मार्च को होलिका दहन होगा। जिसे लोग छोटी होली के नाम से भी जानते है। होली को लेकर कई कथाएं प्रचलित है जिससे आज भी कई लोग अंजान हैं। भारत में सबसे प्रसिद्ध राधा-कृष्ण की होली है, जो हर साल वृंदावन और बरसाने में बड़ी ही धूमधाम से मनाई जाती है लेकिन राधा रानी और कृष्णा जी की होली के अलावा भी इस पर्व से जुड़ी कई और कथाएं भी हैं। 

मुगलों की 'ईद-ए-गुलाबी'

मुगलों के काल में भी होली का त्योहार मनाया जाता था। मुगल शासक शाहजहां होली को ईद-ए-गुलाबी (Eid-e-Gulabi) या फिर आब-ए-पाशी (Aab-e-Pashi) नाम से संबोधित किया करते थे। आब-ए-पाशी का मतलब है रंग-बिरंगे फूलों की वर्षा. इस काल में फूलों से होली खेली जाती थी। 

शिव-पार्वती की होली

पौराणिक कथा के अनुसार हिमालय पुत्री मां पार्वती ने शिव जी तपस्या भंग करने की योजना बनाई। इसके लिए पार्वती जी ने कामदेव की सहायता ली। कामदेव ने प्रेम बाण चलाकर भगवान शिव की तपस्या को भंग कर दिया लेकिन इस बात से शिव जी बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी। उनकी इस क्रोध की ज्वाला में कामदेव का शरीर भस्म हो गया।लेकिन प्रेम बाण ने अपना असर दिखाया और शिव जी को मां पार्वती को देखते ही उनसे प्यार हुआ और उन्हें अपनी पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया। होली की आग को प्रेम का प्रतीम मानकर यह पर्व मनाया जाने लगा।

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हिरणकश्यप की कहानी

एक और प्रचलित कथा के अनुसार हिरणकश्यप अपने विष्णु भक्त बेटे प्रहलाद की हत्या करना चाहता था। इसके लिए वो अपनी बहन होलिका की भी सहायता लेते हैं। दरअसल अत्याचारी हिरणकश्यप ने तपस्या कर भगवान ब्रह्मा से अमर होने का वरदान पा लिया था। वरदान में उसने मांगा था कि कोई जीव-जन्तु, देवी-देवता, राक्षस या मनुष्य, रात, दिन, पृथ्वी, आकाश, घर, या बाहर मार न सके। इस वरदान से घमंड में आकर वह चाहता था कि हर कोई उसे ही पूजे। लेकिन उसका बेटा भगवान विष्णु का परम भक्त था। उसने प्रहलाद को आदेश दिया कि वह किसी और की स्तुति ना करे, लेकिन प्रहलाद नहीं माना। प्रहलाद के ना मानने पर हिरण्यकश्यप ने उसे जान से मारने का प्रण लिया। प्रहलाद को मारने के लिए उसने अनेक उपाय किए लेकिन वह हमेशा बचता रहा। उसके अग्नि से बचने का वरदान प्राप्त बहन होलिका के संग प्रहलाद को आग में जलाना चाहा, लेकिन इस बार भी बुराई पर अच्छाई की जीत हुई और प्रहलाद बच गया। लेकिन उसकी बुआ होलिका जलकर भस्म हो गई। तभी से होली का त्योहार मनाया जाने लगा। 

राधा-कृष्ण की होली

हिंदू धर्म में होली की सबसे प्रचलित कथा भगवान कृष्ण और राधा रानी की है. इस कथा में राक्षसी पूतना एक सुंदर स्त्री का रूप धारण कर बालक कृष्ण के पास जाती है और उन्हें जहरीला दूध पिलाने की कोशिश करती हैं। लेकिन कृष्ण उसको मारने में सफल रहते हैं। पूतना का देह गायब हो जाता है और बाल कृष्ण को जीवित देख सभी गांववालों में खुशी की लहर दौड़ पड़ती है। फिर सब मिलकर पूतना का पुतला बनाकर जलाते हैं।. इस बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी में होली मनाई जाती है।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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