Hindi Newsधर्म न्यूज़Hartalika Teej Fast 2023 Kab hai: Hartalika Teej Vrat Kab Rakha Jayega Pujan Muhurat and Vrat Paran

Hartalika Teej Fast: आज हरतालिका तीज व्रत पारण के दिन भद्रा का पृथ्वी लोक में वास, जानें इसके मायने व पूजन मुहूर्त

When is Hartalika Teej Fast in 2023: हरतालिका तीज व्रत के दिन भगवान शिव व माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। जानें हरतालिका तीज पूजन मुहूर्त व शुभ संयोग-

Saumya Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीTue, 19 Sep 2023 05:19 AM
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Hartalika Teej Fast 2023 Pujan Muhurat: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज व्रत रखा जाता है। इस बार हरतालिका तीज 18 सितंबर 2023, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से सुखद वैवाहिक जीवन और संतान की प्राप्ति होती है।

हरतालिका तीज 2023 शुभ मुहूर्त-

हिंदू पंचांग के अनुसार, 17 सितंबर को सुबह 11 बजकर 08 मिनट से तृतीया तिथि प्रारंभ होगी और 18 सितंबर 2023 को दोपहर 12 बजकर 39 मिनट पर समाप्त होगी। प्रात:काल हरतालिका पूजा मुहूर्त 18 सितंबर को सुबह 06 बजकर 07 मिनट से सुबह 08 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। पूजन की कुल अवधि 02 घंटे 27 मिनट की है।

हरतालिका तीज के दिन बन रहे शुभ संयोग-

हरतालिका तीज के दिन इंद्र योग व रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है। इंद्र योग 19 सितंबर को सुबह 04 बजकर 24 मिनट रहेगा। रवि योग 18 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 08 मिनट से 19 सितंबर को सुबह 06 बजकर 08 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इंद्र व रवि योग में पूजन करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

हरतालिका तीज व्रत का पारण-

हरतालिका तीज व्रत का पारण 19 सितंबर को किया जाएगा। व्रत पारण के दिन भद्राकाल का वास पाताल लोक में रहेगा। भद्रा पाताल लोक में 19 सितंबर को सुबह 01 बजकर 14 मिनट से पूर्ण रात्रि तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, जब भद्रा पाताल लोक में निवास करती है तो इसे पृथ्वी पर रहने वाले प्राणियों के लिए शुभ माना जाता है।

हरतालिका तीज से जुड़ी पौराणिक कथा-

हरतालिका तीज से जुड़ी पौराणिक कथा के कारण इसे इसी नाम से जाना जाता है। हरतालिका शब्द हरत और आलिका से मिलकर बना है जिसका अर्थ क्रमशः अपहरण और फीमेल फ्रेंड है। हरतालिका तीज की पौराणिक कथा के अनुसार, देवी पार्वती की सहेली उन्हें घने जंगल में ले गई ताकि उनके पिता उनकी इच्छा के विरुद्ध उनका विवाह भगवान विष्णु से न कर सकें। देवी पार्वती के अचानक गायब हो जाने पर उनके पिता को लगा कि किसी ने उनकी पुत्री का अपहरण कर लिया है। इसलिए इस दिन को हरतालिका या हरितालिका के नाम से जाना जाता है।

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