DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

Hartalika Teej 2018: भीम ने स्थापित किया था पृथ्वीनाथ का शिवलिंग तो दुख हरते हैं दुखहरणनाथ

दुखहरणनाथ मंदिर नगर का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है। किंवदन्तियों में तो लोग मंदिर का इतिहास सीधे राजा दशरथ के पुत्र भगवान राम से जोड़ रहे हैं।

बाल हनुमान के साथ मदारी रूप में शिव ने किया था विश्राम
बाल हनुमान के साथ मदारी रूप में शिव ने किया था विश्राम

दुखहरणनाथ मंदिर नगर का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है। किंवदन्तियों में तो लोग मंदिर का इतिहास सीधे राजा दशरथ के पुत्र भगवान राम से जोड़ रहे हैं। उनका मानना है कि भगवान शिव बाल राम को रिझाने के लिए हनुमानजी को लेकर अयोध्या गए थे। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार गोण्डा नगर की स्थापना विसेन वंशी राजा मानसिंह ने 1635 ई. में वर्तमान काली भवानी स्थल पर चमत्कार देख कर देवी प्रेरणा से की थी। राजा ने जंगल को साफ कराकर इसे राजधानी बनाया। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के लिए जन सहयोग से यहां तीन सौ साल पहले भव्य मंदिर का निर्माण कराया।

 

Ganesh chaturthi 2018: मोक्ष के लिए करें श्वेत गणपति की पूजा, इस दिन न देखें चंद्रमा

भक्तों के दुख हरण करने शिव के नाम से दुखहरणनाथ महादेव मंदिर कहलाया। यहां पूजा पाठ करने वाले लोगों मंदिर से थोड़ी दूर बस गए जो उपरहितन पुरवा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मंदिर के आदि महंत गुप्तराज हुए। उनके बाद महंत का दायित्व वंशानुगत रूप से हेमराज गिरि और वर्तमान में रुद्र नारायण गिरि संभाल रहे हैं।

अगली स्लाइड में पढ़ें इससे जुड़ी दूसरी मान्यता

महाभारत के भीम ने यहां स्थापित किया था शिवलिंग
महाभारत के भीम ने यहां स्थापित किया था शिवलिंग

भीम ने यहां स्थापित किया था शिवलिंग: मुख्यालय से 30 किमी दूर खरगूपुर कस्बे के निकट अवस्थित पृथ्वीनाथ मंदिर के शिवलिंग की स्थापना भीम ने अज्ञातवास में की थी। ऐसी मान्यता है कि ब्रह्म राक्षस की हत्या के पाप से बचने के लिए शिवलिंग की स्थापना की थी। प्राचीन काल का यह विशालतम शिवलिंग दुर्लभ पत्थर का है। इसकी कलाकृतियों यहां के आने वाले लोगों का मन मोह लेता है।

Hartalika Teej 2018: सबसे बड़ी है हरतालिका तीज, जानिए इसका महत्व

अगली स्लाइड भी पढ़ें...

पांडवों ने अज्ञातवास में स्थापित किये थे शिवलिंग
पांडवों ने अज्ञातवास में स्थापित किये थे शिवलिंग

अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अलग-अलग स्थानों पर विशाल शिवलिंगों की स्थापना की थी। इनमें प्रमुख पृथ्वीनाथ के शिवलिंग को भीम ने, पचरन नाथ में अर्जुन व बहराइच अंतर्गत इमरती विशेश्वरगंज में एक ही गर्भ ग्रह में नकुल सह देव ने शिवलिंगों की स्थापना की। शिवलिंग प्राचीन काल की विशालकाय लाट गुप्त काल की बताई जाती है। इन सभी में पृथ्वीनाथ स्थित मंदिर में स्थापित छः फुट ऊंचाई का शिवलिंग काले कसौटी के दुर्लभ पत्थरों से बना हुआ है।टीले पर स्थित इस मंदिर के बारे में जानकारों का कहना है, कि मुगल सम्राट के कार्यकाल में उनके सेनापति द्वारा यहां पूजा अर्चना की गई थी और मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था।

भीम द्वारा स्थापित यह शिवलिंग धीरे-धीरे जमीन में समा गया कालांतर में खरगूपुर के राजा मानसिंह की अनुमति से यहां के निवासी पृथ्वी सिंह ने मकान निर्माण कराने के लिए खुदाई शुरू कराई। उसी रात में पृथ्वी सिंह को स्वप्न में पता चला कि नीचे सात खंडों का शिवलिंग दबा हुआ है। उन्हें एक खंड तक ही शिवलिंग खोदने का निर्देश हुआ इसके बाद शिवलिंग खुदवाकर पूजा-अर्चना का कार्य शुरू करवा दिया गया और उनके नाम पर ही पृथ्वीनाथ मंदिर नाम पड़ गया। यह एशिया का सबसे बड़ा यह शिवलिंग है। जो 5000 वर्ष पूर्व महाभारत काल का है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से जलाभिषेक दर्शन पूजन करने से लोगों को मनवांछित फल प्राप्त होता है। यहां कजरी तीज के साथ ही महाशिवरात्रि जेठ दशहरा और मलमास अधिमास, श्रावण माह में एक महीने तक मेला लगता है।

Teej 2018: हरितालिका तीज व्रत के दौरान भूलकर भी न करें ये 5 काम

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:hartalika teej dukhharannath mandir lord shiva rama hanuman bheem shivlinga