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8 अप्रैल, 2021|6:59|IST

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Hanuman Jayanti 2021: हनुमान जयंती के दिन बन रहे ये दो शुभ योग और 7 शुभ मुहूर्त, जानें पूजा विधि और मंत्र

हनुमान जयंती के दिन बन रहे कई शुभ योग
हनुमान जयंती के दिन बन रहे कई शुभ योग

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, अंजनी पुत्र हनुमान जी की जयंती 27 अप्रैल 2021 को मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ था। इस साल हनुमान जयंती 27 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। कहते हैं कि संकटमोचन हनुमान अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर कर मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। इस साल हनुमान जयंती कई शुभ योगों और शुभ मुहूर्त में मनाई जाएगी। हनुमान जयंती के दिन सिद्धि योग और व्यतीपात योग बन रहा है।

सिद्धि योग के साथ व्यतीपात योग
सिद्धि योग के साथ व्यतीपात योग

हनुमान जयंती के दिन सिद्धि योग शाम 08 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। इसके बाद व्यतीपात लग जाएगा। इस दिन स्वाती नक्षत्र शान 08 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। उसके बाद विशाखा नक्षत्र लगेगा।

हनुमान जयंती पूजा शुभ मुहूर्त-
हनुमान जयंती पूजा शुभ मुहूर्त-

ब्रह्म मुहूर्त- 04:06 ए एम, अप्रैल 28 से 04:50 ए एम, अप्रैल 28 तक।
अभिजित मुहूर्त- 11:40 ए एम से 12:33 पी एम तक।
विजय मुहूर्त- 02:17 पी एम से 03:09 पी एम तक।
गोधूलि मुहूर्त- 06:26 पी एम से 06:49 पी एम तक।
अमृत काल- 12:26 पी एम से 01:50 पी एम तक। 
निशिता मुहूर्त- 11:44 पी एम से 12:28 ए एम, अप्रैल 28 तक।
त्रिपुष्कर योग- 05:14 ए एम, अप्रैल 28 से 05:33 ए एम, अप्रैल 28 तक।

हनुमान जयंती पूजा विधि-
हनुमान जयंती पूजा विधि-

1. हनुमान जयंती के दिन जातक को ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए।
2. इसके बाद घर की साफ-सफाई करने के बाद गंगाजल का छिड़काव कर घर को पवित्र कर लें।
3. स्नान आदि के बाद हनुमान मंदिर या घर पर पूजा करनी चाहिए।
4. पूजा के दौरान हनुमान जी को लाल सिंदूर और चोला अर्पित करना चाहिए।
5. मान्यता है कि चमेली का तेल अर्पित करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।
6. पूजा के दौरान सभी देवी-देवताओं को जल और पंचामृत अर्पित करें।
7. अब अबीर, गुलाल, अक्षत, फूल, धूप-दीप और भोग आदि लगाकर पूजा करें।
8. हनुमान चालीसा का पाठ करें।
9. आरती के बाद प्रसाद वितरित करें।

हनुमान स्तुति मंत्र
हनुमान स्तुति मंत्र

हनुमान स्तुति मंत्र
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं। 
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।। 
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं। 
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।

हनुमान स्त्रोत
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं।
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं।
रघुपतिप्रियभक्तं वातात्मजं नमामि।।
यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्तकांजलिम।
वाष्पवारिपरिपूर्णालोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम्।।

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