हलेश्वरनाथ महादेव, सीतामढ़ी: यहां ऋषि परशुराम ने की थी शिव पूजा

बजरंगबली सिंह, नई दिल्ली
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कहा जाता है कि सीतामढ़ी में हलेश्वरनाथ स्थान का शिवलिंग रामेश्वरम कालीन है। शिव को समर्पित इस मंदिर से राजा जनक और ऋषि परशुराम की कथाएं भी जुड़ी हैं। हलेश्वरनाथ महादेव का अति प्राचीन शिव मंदिर...

हलेश्वरनाथ महादेव, सीतामढ़ी: यहां ऋषि परशुराम ने की थी शिव पूजा

कहा जाता है कि सीतामढ़ी में हलेश्वरनाथ स्थान का शिवलिंग रामेश्वरम कालीन है। शिव को समर्पित इस मंदिर से राजा जनक और ऋषि परशुराम की कथाएं भी जुड़ी हैं। हलेश्वरनाथ महादेव का अति प्राचीन शिव मंदिर सीतामढ़ी शहर से 5 किलोमीटर उत्तर में स्थित फतहपुर गिरमिसानी गांव में स्थित है। इतिहासकारों के अनुसार यहां स्थापित शिवलिंग दक्षिण भारत के रामेश्वरम शिवलिंग के समकालीन है।

कई एक प्रचलित कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि इस शिवलिंग की स्थापना राजा जनक द्वारा की गई थी। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि मिथिला में एक बार भीषण अकाल पड़ा था। अन्न पानी के लिए लोगों में त्राहिमाम मच गया था। तब इस अकाल से मुक्ति के लिए ऋषि-मुनियों ने राजा जनक को स्वयं बंजर भूमि पर हल चलाने की सलाह दी। राजा जनक भी स्वयं बहुत बड़े ज्ञानी थे। उन्होंने अपने राज्य के पश्चिमी भाग की इस भूमि पर हलेष्टी यज्ञ कर हल चलाने का निर्णय लिया। अत: इसी स्थान पर राजा जनक ने स्वयं अपने हाथों से शिवलिंग स्थापित कर हल चलाना शुरू किया था।

कहा जाता है कि  यही कारण है कि यहां महादेव का नाम हलेश्वरनाथ हो गया। एक अन्य लोकश्रति के अनुसार आरंभ में इस शिवलिंग के गर्भ गृह से बागमती नदी तक सुरंग भी थी और उसके संकेत आज भी मंदिर में उपस्थित हैं। यह भी बताया जाता है कि जनकपुर से शादी के बाद अयोध्या लौट रहे सीता एवं राम ने भी इस शिवलिंग की पूजा की थी। कुछ अन्य ग्रंथों के अनुसार इस शिवलिंग की पूजा ऋषि परशुराम ने भी की थी, क्योंकि यह क्षेत्र ऋषि परशुराम की तपोस्थली भी रह चुका है। 

इस मंदिर से जुड़ी आस्था लोगों में सदियों से बरकरार है। यद्यपि इतिहासकारों के अनुसार यहां के वर्तमान मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में कराया गया था। 1934 के विनाशकारी भूकंप में मंदिर को भारी क्षति पहुंची थी। पूरा सीतामढ़ी क्षेत्र नष्ट हो चुका था। फिर अयोध्या से आए एक संत ने इस स्थान को फिर से बसाया। वर्तमान समय में हलेश्वरनाथ मंदिर प्रांगण में सुव्यवस्था है। यहां मुख्य पर्व-त्योहारों पर भक्तों का तांता लगा करता है। मिथिलांचल के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी लोग यहां आते हैं। सीतामढ़ी के ढे़ग घाट एवं नेपाल के नुनथर घाट से बागमती नदी का पवित्र जल लेकर भक्त यहां शिव जी को अर्पित करते हैं।  
कैसे पहुंचें : सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन व बस स्टेशन से हलेश्वरनाथ की दूरी 4 किलोमीटर के लगभग है। पटना निकटतम हवाई अड्डा है।

 

Anuradha Pandey

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जानें Sawan 2026, Rashifal और Panchang की सटीक जानकारी। रोजाना पूजा-पाठ के लिए पढ़ें Shiv Chalisa, Shiv Aarti, Shiv Mahamrityunjaya Mantra, Shiv Stuti, Hanuman Chalisa और Bajrang Baan
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