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गुरु गोचर से मिथुन, कर्क राशि वालों के जीवन में होगी उथल-पुथल, बचाव के लि्ए करें ये उपाय

देवगुरु को ज्योतिष में विशेष स्थान प्राप्त है। देवगुरु बृहस्पति को गुरु को ज्ञान, शिक्षक, संतान, बड़े भाई, शिक्षा, धार्मिक कार्य, पवित्र स्थल, धन, दान, पुण्य और वृद्धि आदि का कारक ग्रह कहा जाता है।

गुरु गोचर से मिथुन, कर्क राशि वालों के जीवन में होगी उथल-पुथल, बचाव के लि्ए करें ये उपाय
Yogesh Joshiज्योतिषाचार्य पंडित दिवाकर त्रिपाठी,नई दिल्लीWed, 01 May 2024 01:51 PM
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Guru Gochar Jupiter Transit : देवगुरु बृहस्पति को ज्योतिष में विशेष स्थान प्राप्त है। देवगुरु बृहस्पति को गुरु को ज्ञान, शिक्षक, संतान, बड़े भाई, शिक्षा, धार्मिक कार्य, पवित्र स्थल, धन, दान, पुण्य और वृद्धि आदि का कारक ग्रह कहा जाता है। बृहस्पति ग्रह 27 नक्षत्रों में पुनर्वसु, विशाखा, और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के स्वामी होते  हैं। देवगुरु बृहस्पति ने आज वृषभ राशि में प्रवेश कर लिया है। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार देवगुरु के वृषभ राशि में प्रवेश करने से मिथुन, कर्क राशि के जीवन में उथल-पुथल संभव है।

मिथुन :- मिथुन राशि तथा लग्न के लिए बृहस्पति सप्तम अर्थात दांपत्य भाव एवं दशम अर्थात राज्य भाव के कारक ग्रह होकर व्यय भाव वृषभ राशि में गोचर आरंभ करेंगे। ऐसी स्थिति में अचानक खर्च में वृद्धि। भोग विलासिता के खर्च में वृद्धि। दूरस्थ यात्रा के खर्च में वृद्धि। धार्मिक यात्राओं पर खर्च की स्थिति। धार्मिक कार्यों पर खर्च की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ सकता है। जीवनसाथी को लेकर मानसिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। नौकरी तथा व्यवसाय में सामान्यतः तनाव में वृद्धि की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। परिश्रम में रुकावट की स्थिति बन सकती है। बृहस्पति की दृष्टि कन्या राशि चतुर्थ स्थान सुख भाव पर होगी। फलतः गृह एवं वाहन सुख में वृद्धि। गृह एवं वाहन पर खर्च की स्थिति। माता के स्वास्थ्य में सुधार। जमीन जायदाद एवं स्थिर संपत्ति में वृद्धि की स्थिति उत्पन्न होगी। सुख के संसाधनों पर खर्च बढ़ सकता है। बृहस्पति की दृष्टि वृश्चिक राशि छठे स्थान रोग, ऋण, शत्रु के भाव पर होगी। फलत: आंतरिक शत्रुओं में वृद्धि की संभावना बनेगी । अति घनिष्ठ व्यक्ति से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। लिवर एवं आंतरिक समस्या के कारण तनाव उत्पन्न हो सकता है। एलर्जी की समस्या के कारण तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। बृहस्पति की तीसरी दृष्टि मकर राशि अष्टम भाव पर होगी फलतः स्वास्थ्य में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। पुराने रोगों से मुक्ति मिल सकती है। अचानक से धन लाभ भी हो सकता है। ससुराल पक्ष से भी लाभ की स्थिति बन सकती है। विरोधी व्यक्तियों से भी लाभ का संयोग बना सकता है। 
उपाय :- बृहस्पति से संबंधित नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए 21 बृहस्पतिवार श्री विष्णु मंदिर में पीले फूल चढ़ाएं एवं बूंदी का प्रसाद चढ़ाकर लोगो मे बाँट दें। 

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कर्क :- कर्क राशि एवं लग्न के लोगों के लिए बृहस्पति षष्ठ स्थान रोग भाव एवं नवम स्थान भाग्य भाव के कारक होकर लाभ भाव वृष राशि में गोचर आरंभ करेंगे। परिणाम स्वरूप आर्थिक गतिविधियों में सुधार। व्यापारिक विस्तार का संयोग बनाएंगे। अचानक धन लाभ एवं अचानक अवरोध की स्थिति उत्पन्न करेंगे होगा। पैतृक संपत्ति को लेकर तनाव उत्पन्न हो सकता है । परंतु विजय प्राप्त होगी । कर्ज से मुक्ति प्राप्त होगी। अति घनिष्ठ व्यक्ति से चल रहा विवाद समाप्त होगा। कार्यों में भाग्य का साथ प्राप्त होगा। पिता के सहयोग सानिध्य में वृद्धि की स्थिति होगी। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगा । आर्थिक मामलों में भाग्य का साथ प्राप्त होगा। बृहस्पति की दृष्टि कन्या राशि पराक्रम भाव पर होने के कारण पराक्रम में वृद्धि होगी। भाई, बहनों तथा मित्रों के सहयोग के सानिध्य में वृद्धि होगा। सामाजिक पद प्रतिष्ठा एवं सम्मान में वृद्धि होगा। सामाजिक स्तर पर कार्य करने की इच्छा बलवती होगी। कर्म क्षेत्र में प्रगति का संयोग बनेगा । नेतृत्व क्षमता में वृद्धि का योग बनेगा। कार्य करने के प्रति इच्छा बलवती होगी । राजनीति के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए समय अनुकूल प्रद बना रहेगा। बृहस्पति की अगली दृष्टि पंचम भाव वृश्चिक राशि पर होगा। फलतः अध्ययन अध्यापन के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए समय सकारात्मक होगा। डिग्री एवं शिक्षा क्षेत्र के लिए समय उत्तम रहेगा। बौद्धिक क्षमता के आधार पर आर्थिक कार्य कर पाने में सफलता प्राप्त करेंगे। लेखन क्षेत्र में रुचि बढ़ेगी । संतान पक्ष से शुभ समाचार प्राप्त होगा। संतान की प्रगति से मन प्रसन्न रहेगा। धार्मिकता के क्षेत्र में रुचि बढ़ेगी। मन में सकारात्मकता का भाव जागृत होगा। बृहस्पति की नवम दृष्टि मकर राशि सप्तम भाव पर होगी। परिणाम स्वरूप साझेदारी के कार्यों से लाभ की स्थिति। दैनिक आय में प्रगति की स्थिति । दांपत्य जीवन एवं प्रेम संबंधों में सुधार की स्थिति । वैवाहिक कार्यों में चल रहे अवरोध समाप्त होंगे। नए रोजगार का सृजन हो सकता है। नौकरी तथा व्यवसाय में सकारात्मक परिवर्तन हो सकता है। अति घनिष्ठ व्यक्ति से लाभ की स्थिति प्राप्त होगी। मूल कुंडली में बृहस्पति के कमजोर होने पर तनाव बढ़ सकता है। अतः बृहस्पति को मजबूत करने के लिए उपाय करें।
उपाय :- बृहस्पतिवार के दिन किसी भी मंदिर में जाकर मंदिर की साफ सफाई करें। गुरुओं की सेवा करें तथा किसी भी साधु संत की बेज्जती ना करें।