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पंचांग-पुराणसक्सेस मंत्र : पूरी परिस्थिति को समझे बिना प्रतिक्रिया देना समझदारी नहीं

लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्ली Published By: Aparajita
Sat, 08 Dec 2018 08:27 PM
सक्सेस मंत्र : पूरी परिस्थिति को समझे बिना प्रतिक्रिया देना समझदारी नहीं

आपने अक्सर ऐसे लोग देखे होंगे, जो किसी भी मामले में अपनी राय देने में जरा भी देर नहीं लगाते हैं। मामला कोई भी हो और कैसा भी हो, यह लोग अपनी राय बिना देर किए देते हैं। मगर कई बार उनकी सोच बेहद गलत होती है, इसका नतीजा यह होता है कि वे पूरी परिस्थिति से अनभिज्ञ अपने मन में ख्याली पुलाव पकाते रहते हैं। इस वजह से कई बार उन्हें बड़ा खामियाजा भी भुगतना पड़ता है। हैरत की बात तो यह है कि ऐसे लोग आसपड़ोस ही नहीं ऑफिस, कॉलेज और रास्ता चलते भी मिल जाते हैं। इनके साथ समय बर्बाद करने से बेहतर है अपने काम से काम रखा जाए। इस कहानी में भी ऐसा ही कुछ बताया गया है।

एक डॉक्टर बड़ी ही तेजी से हॉस्पिटल में घुसा, उसे किसी एक्सीडेंट के मामले में तुरंत बुलाया गया था। अंदर घुसते ही उसने देखा कि जिस लड़के का एक्सीडेंट हुआ है उसके परिजन बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार कर रहे हैं।

डॉक्टर को देखते ही लड़के का पिता बोला, आप लोग अपनी ड्यूटी ठीक से क्यों नहीं करते, आपने आने में इतनी देर क्यों लगा दी, अगर मेरे बेटे को कुछ हुआ तो इसके जिम्मेदार आप होंगे।

डॉक्टर ने विनम्रता कहा, आई ऍम सॉरी, मैं हॉस्पिटल में नहीं था, और कॉल आने के बाद जितना तेजी से हो सका मैं यहां आया हूं। कृपया अब आप लोग शांत हो जाइये ताकि मैं इलाज कर सकूं।

शांत हो जाइए, लड़के का पिता गुस्से में बोला, क्या इस समय अगर आपका बेटा होता तो आप शांत रहते? अगर किसी की लापरवाही की वजह से आपका अपना बेटा मर जाए तो आप क्या करेंगे? पिता बोले ही जा रहा था।

भगवान चाहेगा तो सब ठीक हो जाएगा, आप लोग दुआ कीजिए मैं इलाज के लिए जा रहा हूं। और ऐसा कहते हुए डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर में प्रवेश कर गया। बाहर लड़के का पिता अब भी बुदबुदा रहा था, सलाह देना आसान होता है, जिस पर बीतती है वही जानता है।

करीब डेढ़ घंटे बाद डॉक्टर बाहर निकला और मुस्कुराते हुए बोला, भगवान् का शुक्र है आपका बेटा अब खतरे से बाहर है। यह सुनते ही लड़के के परिजन खुश हो गए और डॉक्टर से सवाल पर सवाल पूछने लगे, वो कब तक पूरी तरह से ठीक हो जाएगा, उसे डिस्चार्ज कब करेंगे? 
पर डॉक्टर जिस तेजी से आया था उसी तेजी से वापस जाने लगा और लोगों से अपने सवाल नर्स से पूछने को कहा। ये डॉक्टर इतना घमंडी क्यों है, ऐसी क्या जल्दी है कि वो दो मिनट हमारे सवालों का जवाब नहीं दे सकता? लड़के के पिता ने नर्स से कहा।

नर्स लगभग रुंआसी होती हुई बोली, आज सुबह डॉक्टर साहब के लड़के की एक भयानक एक्सीडेंट में मौत हो गई, और जब हमने उन्हें फोन किया था तब वे उसका अंतिम संस्कार करने जा रहे थे। और बेचारे अब आपके बच्चे की जान बचाने के बाद अपने लाडले का अंतिम संस्कार करने के लिए वापस लौट रहे हैं। यह सुन लड़के के परिजन और पिता स्तब्ध रह गए और उन्हें अपनी गलती का ऐहसास हो गया।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है :
बहुत बार हम किसी परिस्थिति के बारे में अच्छी तरह जाने बिना ही उसपर प्रतिक्रिया कर देते हैं। पर हमें चाहिए कि हम खुद पर नियंत्रण रखें और पूरी स्थिति को समझे बिना कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया न दें। वर्ना अनजाने में हम उसे ही ठेस पहुंचा सकते हैं जो हमारा ही भला सोच रहा हो।

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