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गणेश चतुर्थी 2018: किसी भी शुभ काम से पहले क्यों होती है गणेश पूजा, जानें पूरी कथा

ganesh chaturthi 2018

किसी भी शुभकार्य को करने से पहले लोग अक्सर पूजा पाठ करते हैं। घर से बाहर जाना हो, नए घर में शिफ्ट होना हो या फिर कोई त्योहार ही क्यों न हो, ज्यादातर लोग भगवान की पूजा करते ही हैं। इसी तरह किसी भी शुभ काम करने से पहले जिन भगवान की पूजा सबसे पहले की जाती है, वे गणेश जी ही हैं। किसी भी काम का शुभारंभ करने से पहले लोग सबसे पहले श्रीगणेशाय नम: लिखते हैं। इस साल गणेश चतुर्थी की शुरुआत 13 सितंबर से हो रही है गणेश चतुर्थी में गणेश जी की पूजा होती है। गणेश चतुर्थी ही नहीं, बल्कि कई अन्य त्योहारों में सबसे पहले गणेश जी की पूजा होती है। दरअसल इसके पीछे मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से किसी भी शुभ कार्य में कोई विघ्न, बाधा नहीं आती है। जो कार्य आप कर रहे हैं, वह सकुशल संपन्न होता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। 

एक बार सभी देवताओं में इस बात को लेकर विवाद हो गया कि आखिर किन भगवान की पूजा सबसे पहले की जाए। इसको लेकर विवाद काफी आगे बढ़ता चला गया। सभी देवता खुद को सर्वेश्रेष्ठ बता रहे थे। इसी दौरान नारद जी वहां पहुंचे और पूरी स्थिति समझी। नारद जी ने सभी देवताओं से कहा कि यदि इस मामले को सुलझाना है तो उन्हें शिव भगवान की शरण में जाना चाहिए। शिवजी के पास आने के बाद शिवजी ने कहा कि वे जल्द ही इस पूरे मामले को एक प्रतियोगिता के जरिए से सुलझाएंगे। 

भगवान शिव ने एक प्रतियोगिता आयोजित की। इसमें सभी देवताओं को आदेश दिया गया कि वे सभी अपने वाहन में सवार हो जाएं। आदेश मानने के बाद उन्हें ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाकर आने को कहा गया। शिवजी ने कहा, 'जो देवता ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाने के बाद सबसे पहले यहां पहुंचेगा, उसी की इस प्रतियोगिता में जीत होगी। वह देवता ही आगे सबसे पहले पूजा जाएगा।' 

सभी देवता इस प्रतियोगिता को जीतने के इरादे से अपने वाहन में सवार हुए और ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाने के लिए निकल पड़े। इसी दौरान गणेश जी अपने वाहन में नहीं सवार हुए। वे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाने के बजाए अपने माता-पिता यानि की भगवान शिवजी और माता पार्वती के चक्कर लगाने लगे। उन्होंने सात बार परिक्रमा की और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। 

जब सभी देवता ब्रह्माण्ड की परिक्रमा लगाकर वापस आए तो उन्होंने गणेशजी को वहीं खड़ा हुआ पाया। इसके बाद बारी आई प्रतियोगिता का रिजल्ट जारी करने की। भगवान शिवजी ने फौरन गणेश जी को विजयी घोषित कर दिया। इसपर सभी ने वजह पूछी। भगवान शिवजी ने कहा, ब्रह्माण्ड में माता पिता को सबसे ऊंचा स्थान दिया गया है। माता पिता की पूजा करना ही सबकुछ है। इसके बाद से ही गणेशजी की पूजा सबसे पहले होने लगी। 

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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  • Web Title:Ganesha Chaturthi why do we worship ganpati first