DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

समृद्धि लाएंगे गणपति, मूर्ति स्थापना में इन बातों का रखें ध्यान

भगवान श्रीगणेश बल, विद्या, बुद्धि प्रदान करने वाले हैं। मंगल और समृद्धि की कामना के साथ उनकी पूजा की जाती है। गणेश चतुर्थी पर भगवान श्रीगणेश की मूर्ति स्थापित करने की परंपरा है। भगवान श्रीगणेश की मूर्ति स्थापना के समय कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं इनके बारे में।

भगवान श्रीगणेश की मूर्ति स्थापना के समय ध्यान रखना चाहिए कि उनके एक हाथ में अंकुश, मोदक और उनका टूटा हुआ दांत होना चाहिए। एक हाथ आशीर्वाद देते हुए होना चाहिए। साथ में उनकी सवारी मूषक भी हो। भगवान श्रीगणेश के मुख की तरफ समृद्धि, सिद्धि, सुख और सौभाग्य होता है। ध्यान रखें कि मूर्ति का मुख दरवाजे की ओर नहीं होना चाहिए। दायीं ओर सूंड वाले गणपति देर से प्रसन्न होते हैं, जबकि बाईं ओर सूंड वाले गणपति शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। घर में भगवान श्रीगणेश की मूर्ति इस प्रकार स्‍थापित करें कि उनकी पीठ किसी भी कमरे की ओर न हों। कभी भी सीढ़ियों के नीचे भगवान की मूर्ति स्‍थापित न करें। वास्‍तु के अनुसार ऐसा करने से घर में दुर्भाग्‍य आता है। गणेश चतुर्थी पर बच्चों के अध्ययन कक्ष में भगवान श्रीगणेश की मूर्ति लगाना श्रेष्ठ माना जाता है। गणेश चतुर्थी पर पूजा के दौरान तुलसी अर्पित नहीं करनी चाहिए। घर में भगवान श्रीगणेश की बैठी हुई प्रतिमा जबकि कार्यस्थल पर अन्य मुद्राओं वाले रूप की मूर्ति रखी जा सकती है। ध्यान रखें कि भगवान श्रीगणेश के दोनों पैर जमीन को स्पर्श कर रहे हों। एक ही जगह पर भगवान श्रीगणेश की दो मूर्ति एक साथ न रखें।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Ganesh Chaturthi
Astro Buddy