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गणेश चतुर्थी 2018: दुर्वा के बिना अधूरी है गणेश जी की पूजा, दुर्वा चढ़ाते हुए बोले यह मंत्र

गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी इस बार 13 सितंबर को मनाई जाएगी। इन दिनों गणेशजी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। गणेशजी को पूजा में कई चीजें चढ़ाई जाती हैं जैसे चावल, फूल, दूर्वा आदि। लेकिन गणेश जी की पूजा में दूर्वा का काफी महत्व है कहा जाता है कि इसके बिना गणेश पूजा पूरी नहीं होती है। 

गणेशजी को दूर्वा क्यों चढ़ाते हैं

एक कथा के अनुसार पुराने समय में अनलासुर नाम का एक असुर था। जिसकी वजह से स्वर्ग और धरती पर सभी त्रस्त थे। अनलासुर ऋषि-मुनियों और आम लोगों को जिंदा निगल जाता था। असुर से त्रस्त होकर देवराज इंद्र सहित सभी देवी-देवता और प्रमुख ऋषि-मुनि महादेव से प्रार्थना करने पहुंचे। सभी ने शिवजी से प्रार्थना की कि वे अनलासुर का नाश करें। शिवजी ने सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की प्रार्थना सुनकर कहा कि अनलासुर का अंत केवल गणेश ही कर सकते हैं।

जब गणेश ने अनलासुर को निगला तो उनके पेट में बहुत जलन होने लगी। कई प्रकार के उपाय किए गए, लेकिन गणेशजी के पेट की जलन शांत नहीं हो रही थी। तब कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठ बनाकर श्रीगणेश को खाने को दी। जब गणेशजी ने दूर्वा ग्रहण की तो उनके पेट की जलन शांत हो गई। तभी से श्रीगणेश को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा प्रारंभ हुई।

गणेश जी को दूर्वा चढ़ाते वक्त ये सभी मंत्र बोलें

ॐ गणाधिपाय नमः ,ॐ उमापुत्राय नमः ,ॐ विघ्ननाशनाय नमः ,ॐ विनायकाय नमः
ॐ ईशपुत्राय नमः ,ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः ,ॐ एकदन्ताय नमः ,ॐ इभवक्त्राय नमः
ॐ मूषकवाहनाय नमः ,ॐ कुमारगुरवे नमः

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इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैंजिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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  • Web Title:Ganesh Chaturthi 2018 why we offer durva to ganesh ji