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गणेश चतुर्थी 2018: ऐसे अपने घर लाइये गणपति जी को और ऐसे करिए प्रतिदिन पूजा, देखें वीडियो

गणेश चतुर्थी 2018: ऐसे अपने घर लाइये गणपति जी को और ऐसे करिए प्रतिदिन पूजा
गणेश चतुर्थी 2018: ऐसे अपने घर लाइये गणपति जी को और ऐसे करिए प्रतिदिन पूजा

13 सितंबर से गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से शुरू होगा। मान्यता है कि गणपति को अपने घर में प्रतिष्ठापित करने से सारे कष्ट मिट जाते हैं।  गणपति महाराज विघ्नों को दूर करने वाले और मंगल करने वाले देव हैं। किसी भी देव की पूजा हो, घर में मंगल कार्य हों, बिना गणपति की पूजा के कोई विधान पूरा नहीं होता। यह अधिकार भगवान शंकर ने उनको प्रदान किया है। इसलिए, वह देवों के देव हैं। देवों में अग्रणी देव। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति को घर में विराजमान करने का विधान है। आइये, हम आपको बताते हैं कि किस प्रकार गणपति को अपने घर में विराजमान करें।

कैसे उनका आह्वान करें। गणपति का आह्वान ठीक उसी प्रकार होता है, जैसे आप गृह प्रवेश करते हैं।

इस सप्ताह है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और श्री गणेश चतुर्थी व्रत
 

संकल्प: पहले दाएं हाथ में अक्षत और गंगाजल लेकर संकल्प करें कि हम गणपति को अपने घर तीन, पांच, सात और दस दिन के लिए विराजमान करेंगे। ऊं गणेशाय नम: मंत्र के साथ संकल्प लें। यह संकल्प हुआ कि आप भगवान गणपति को अपने घर में विराजमान करेंगे। प्रतिदिन उनकी पूजा करेंगे।
 

आह्वान: संकल्प के बाद आप गणपति जी को लेकर आइये। लेकिन इससे पहले घर का सजाए-संवारे। घर स्वच्छ हो। जिस स्थान पर विराजमान करना हो, वह पवित्र होना चाहिए। आह्वान करें कि हे गणपति, हम आपको अपने घर में ......( दिन का उल्लेख करें)  के लिए अपने समस्त परिवार.....( परिवार के सदस्यों के नाम लें).....अमुक गोत्र...( गोत्र का नाम लें) घर में सुख शांति समृद्धि के लिए प्रतिष्ठापित कर रहे हैं। हे गणपति, आप हमारी मनोकामनाएं पूरी करें और ऋद्धि-सिद्धि के साथ विराजमान हों। ज्ञात-अज्ञात यदि हमसे कोई भूल हो जाए तो आप क्षमा करना। आह्वान मंत्र कोई भी हो सकता है। यदि संस्कृत श्लोक न कर सकें तो ऊं गणेशाय नम: का ही जाप करते रहें।

पूजा स्थल
नियत दिन पर आप गणपति को अपने घर में विराजमान करें। कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। चार हल्दी की बिंदी लगाएं। एक मुट्ठी अक्षत रखें। इस पर छोटा बाजोट, चौकी या पटरा रखें। लाल, केसरिया या पीले वस्त्र को उस पर बिछाएं। रंगोली, फूल, आम के पत्ते और अन्य सामग्री से स्थान को सजाएं। एक तांबे का कलश पानी भर कर, आम के पत्ते और नारियल के साथ सजाएं। यह समस्त तैयारी गणेश उत्सव के आरंभ होने के पहले कर लें।

गणपति की प्रतिष्ठापना
जब गजानन को लेने जाएं तो स्वच्छ और नवीन वस्त्र धारण करें।  यथासंभव, चांदी की थाली में स्वास्तिक बनाकर और फूल-मालाओं से सजाकर उसमें गणपति को विराजमान करके लाएं। यदि चांदी की थाली संभव न हो पीतल या तांबे की भी चलेगी। मूर्ति बड़ी है तो आप हाथों में लाकर भी विराजमान कर सकते हैं। जब घर में विराजमान करें तो मंगलगान करें, कीर्तन करें। गणपति को लड्डू का भोग लगाएं। लाल पुष्प चढ़ाएं। प्रतिदिन प्रसाद के साथ पंच मेवा जरूर रखें।

पांच इलायची और पांच कमलगट्टे
भगवान गणपति के आगे एक छोटी कटोरी में पांच छोटी इलायची और पांच कमलगट्टे रख दें। गणेश चतुर्थी तक इनको गणपति के आगे ही रहने दें। चतुर्थी के बाद कमलगट्टे एक लाल कपड़े में करके पूजा स्थल पर रहने दें और छोटी इलायची को गणपति का प्रसाद मानते हुए ग्रहण कर लें। यह समस्त कार्यों की सिद्धि का उपाय है। सारे कष्ट इससे समाप्त होते हैं। चंद्रमा, राहू, केतू की छाया भी नहीं पड़ेगी।

पूजन विधि :
आचमन- ॐ केशवाय नम:। ॐ नारायणाय नम:। ॐ माधवाय नम:।

कहकर हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें एवं ॐ ऋषिकेशाय नम: कहकर हाथ धो लें।
इसके बाद  शरीर शुद्धि करें..
ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि:।।

गणपति स्थापना में इन बातों का रखें ध्यान
गणपति स्थापना में इन बातों का रखें ध्यान

इसका ध्यान रखें
- जल से भरा हुआ कलश गणेश जी के बाएं रखें।
 -चावल या गेहूं के ऊपर स्थापित करें।
- कलश पर मौली बांधें एवं आमपत्र के साथ एक नारियल उसके मुख पर रखें।
-गणेश जी के स्थान के सीधे हाथ की तरफ घी का दीपक एवं दक्षिणावर्ती शंख रखें।
-गणेश जी का जन्म मध्याह्न में हुआ था, इसलिए मध्याह्न में ही प्रतिष्ठापित करें।
-10 दिन तक नियमित समय पर आरती करें।
- पूजा का समय नियत रखें। जाप माला की संख्या भी नियत ही रखें।
-गणेश जी के सम्मुख बैठकर उनसे संवाद करें। मंत्रों का जाप करें। अपने कष्ट कहें।
-शिव परिवार की आराधना अवश्य करें यानी भगवान शंकर और पार्वती जी का ध्यान अवश्य करें।


सुपारी गणेश और मिट्टी के गणेश भी रख सकते हैं
यदि आपकी सामर्थ्य न हो तो आप घर में सुपारी गणेश और पीली मिट्टी से गणेशाकृति बनाकर उनको स्थापित कर सकते हैं। इसमे कोई दोष नहीं है। सुपारी गणेश और पीली मिट्टी के गणेश जी बनाकर स्थापित करने से वास्तु दोष भी समाप्त होते हैं। लेकिन इतना ध्यान रखें कि पूजा नियमित हो। पीली मिट्टी के गणेश जी का स्नान नहीं हो सकता, इसलिए गंगाजल के छींटे लगा सकते हैं।

पढ़ें गणपति के षोडषोपचार पूजन के बारे में
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पूजन विधि और सामग्री :

पंचोपचार पूजन- 1. गंध, 2. पुष्प, 3. धूप, 4. दीप, 5 नैवेद्य।

षोडषोपचार पूजन-
1. आह्वान,
2 आसन
3 पाद्य (हाथ में जल लेकर मंत्र पढ़ते हुए प्रभु के चरणों में अर्पित करें),
4. अर्घ्य
5 आचमन
6. स्नान (पान के पत्ते या दूर्वा से स्नान कराएं)
7. वस्त्र
8. जनेऊ
9. हार, मालाएं
10. गंध (इत्र छिड़कें या चंदन अर्पित करें),
11. पुष्प,
12. धूप,
13. दीप,
14. नैवेद्य (पान के पत्ते पर फल, मिठाई, मेवे आदि रखें।),
15. ताम्बूल (पान चढ़ाएं),
16. प्रदक्षिणा व पुष्पांजलि।

गणेशोत्सव मुहूर्त

13 सितंबर मध्याह्न गणेश पूजा का समय - 11:03 से 13:30

12 सितंबर को, चन्द्रमा को नहीं देखने का समय - 16:07 से 20:33

13 सितंबर को, चन्द्रमा को नहीं देखने का समय - 9:31 से 21:12

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ -12सितम्बर 2018 को 16: 07 बजे

चतुर्थी तिथि समाप्त - 13 सितम्बर 2018 को 14 :51 बजे

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  • Web Title:Ganesh Chaturthi 2018: read here shubh muhurat of Ganapati ji sthapna at your home and puja vidhi