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Ganesh chaturthi 2018: अज्ञान का आवरण हटाते हैं गणेश

 गणेश चतुर्थी (youtube)

आदि शंकराचार्य ने गणेशजी के स्वरूप को बहुत सुंदर तरीके से बताया है। वह ‘अजं निर्विकल्पं निराकारमेकं' हैं। वह ‘अजं' यानी अजन्मे हैं, ‘निर्विकल्पं' यानी ‘निर्गुण' हैं, वह ‘निराकार' हैं, उस चेतना के प्रतीक हैं, जो सर्वव्यापी है। गणेश वह ऊर्जा हैं, जो ब्रह्मांड का कारण है, जिससे सब प्रकाशित है और जिसमें सब विलीन हो जाता है।

मां पार्वती जब भगवान शिव के साथ उत्सव मना रही थीं, उनका शरीर धूल से गंदा हो गया। जब उन्हें यह महसूस हुआ तो उन्होंने शरीर से धूल उतारी और उससे एक बालक की सृष्टि की, फिर उस बालक से कहा कि जब तक वह स्नान कर रही हैं, तब तक वह द्वार पर पहरा दे। भगवान शिव जब वापस लौटे, बालक ने उन्हें नहीं पहचाना और उनका रास्ता रोक लिया। क्रुद्ध शिवजी ने बालक का सिर काट दिया। यह देख कर मां पार्वती स्तब्ध रह गईं। उन्होंने कहा कि बालक उनका पुत्र था और भगवान शिव किसी भी कीमत पर बालक को पुनर्जीवित करें। शिवजी ने अपने सहायकों को आदेश दिया- ‘जाओ और ऐसे जीव का सिर ले आओ, जो उत्तर की ओर मुख करके सोया हो।' सहायक तब एक गज का सिर लेकर आए, जिसे भगवान शिव ने बालक के धड़ से जोड़ दिया और इस तरह गणेशजी का जन्म हुआ।

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इस कथा का एक गूढ़ अर्थ है। मां पार्वती उत्सव ऊर्जा का प्रतीक हैं। उनका गंदा होना इस बात का संकेत है कि उत्सव आसानी से ‘राजसिक' या चंचल बना सकता है। धूल अज्ञान और शिवजी परम सरलता, शांति और ज्ञान के प्रतीक हैं। जब गणेश ने शिव का मार्ग रोका तो इसका अर्थ हुआ कि अज्ञान ने ज्ञान को नहीं पहचाना। उस स्थिति में ज्ञान को अज्ञान के ऊपर विजय प्राप्त करनी थी। भगवान शिव द्वारा बालक का सिर विच्छेद किए जाने के पीछे यही प्रतीकात्मकता थी। हाथी का सिर क्यों? गज यानी हाथी ‘ज्ञान शक्ति' और ‘कर्म शक्ति' दोनों का प्रतिनिधित्व करता है। गज के मुख्य गुण हैं विवेक और सहजता। हाथी का विशाल सिर विवेक और ज्ञान का द्योतक है। इसलिए जब हम गणेश पूजा करते हैं तो हमारे अंदर गज के ये गुण जागृत होते हैं।

गणेशजी का विशाल उदर उदारता और पूर्ण स्वीकार भाव को अभिव्यक्त करता है। गणेशजी के उठे हुए हाथ रक्षा का भाव प्रदर्शित करते हैं। इसका अर्थ है भयभीत मत हो- मैं तुम्हारे साथ हूं। उनके नीचे के हाथ, जिनकी हथेलियां सामने की ओर हैं, का अर्थ है- अनंत दान व झुकने का आह्वान। गणेश जी का एक गजदंत भी है, जो एकाग्रता का प्रतीक है। वह अपने हाथों में अंकुश (जागृति का प्रतीक) और पाश (नियंत्रण का प्रतीक) धारण करते हैं। जागरूकता से बहुत ऊर्जा मुक्त होती है, जिसका उचित नियंत्रण नहीं किया गया तो वह विध्वंसक हो सकती है।

गज के सिर वाले गणेश मूषक जैसी सवारी पर क्यों भ्रमण करते हैं? यहां फिर प्रतीकात्मकता है, जो बहुत गूढ़ है। मूषक रस्सियों को काटता है, कुतरता है, जो बांधने का काम करती हैं। मूषक उस मंत्र की तरह है, जो अज्ञान को काटता है और परम ज्ञान की ओर ले जाता है, जिसके प्रतिनिधि गणेश हैं।

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  • Web Title:Ganesh chaturthi 2018: know about lord Ganesha and read here ganesh katha