ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News AstrologyEkadashi Do recite this story on the day of Papankusha Ekadashi Katha Kahani you will get wealth

आज जरूर करें पापांकुशा एकादशी कथा का पाठ, खूब मिलेगा सुख-सौभाग्य

Papankusha Ekadashi Katha: पापांकुशा एकादशी के दिन पूरे विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन के दुख-दर्द दूर हो सकते हैं। इस दिन लक्ष्मी नारायण की साथ में पूजा करनी चाहिए।

आज जरूर करें पापांकुशा एकादशी कथा का पाठ, खूब मिलेगा सुख-सौभाग्य
Shrishti Chaubeyलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीWed, 25 Oct 2023 11:04 AM
ऐप पर पढ़ें

पापांकुशा एकादशी कब है: धार्मिक मानयाताओं में पापांकुशा एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष तिथि की एकादशी को ही पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। पापांकुशा एकादशी के दिन पूरे विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन के दुख-दर्द दूर हो सकते हैं। इस दिन लक्ष्मी नारायण की साथ में पूजा करना शुभ माना जाता है। वहीं, पापांकुशा एकादशी का व्रत बिना कथा का पाठ किए अधूरा माना जाता है। इस दिन पापांकुशा एकादशी कथा का पाठ करना बेहद पुण्यदायक माना जाता है। इसलिए आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी का पूजा मुहूर्त और कथा- 

Ahoi Ashtami: अहोई अष्टमी व्रत कब? संतान की तरक्की के लिए इसका खास महत्व, नोट करें डेट

पापांकुशा एकादशी पूजा का मुहूर्त
रवि योग- सुबह 06 बजकर 29 मिनट- दोपहर 01 बजकर 30 मिनट तक
वृद्धि योग- प्रात:काल से दोपहर 12 बजकर 17 मिनट तक 

पापांकुशा एकादशी व्रत की कथा

प्राचीन काल की बात है। विंध्य नामक पर्वत पर क्रोधन नामक एक बहेलिया निवास करता था। वह अत्याचारी स्वभाव का था। उसका सारा समय दुष्टता, लूटपाट, मद्यपान और गलत संगति पाप कर्मों में ही बीत जाता था। जब जीवन के अंतिम वक्त में यमराज के दूत बहेलिये को लेने आ गए और यमदूत ने बहेलिये से कहा कि कल तुम्हारे जीवन का आखिरी दिन है। कल हम तुम्हें लेने आएंगे। यह बात सुनकर बहेलिया बहुत ज्यादा दर गया और महर्षि अंगिरा के आश्रम में जा पहुंचा। फिर महर्षि अंगिरा के पैरों पर गिरकर प्रार्थना करने लगा।

Dussehra: आज शाम तक जरूर कर लें ये काम, खूब कमाएंगे धन-धान्य

बहेलिये ने महर्षि अंगिरा से कहा, मैंने अपना सारा जीवन पाप कर्म करने में ही व्यतीत कर दिया। कृपा कर मुझे कोई ऐसा उपाय बता दीजिए, जिससे मेरे सभी पाप खत्म हो जाएं और ,मुझे मोक्ष की प्राप्ति हो जाए। बहेलिये के निवेदन पर महर्षि अंगिरा ने उसे आश्विन शुक्ल की पापांकुशा एकादशी का पूरे विधि-विधान से व्रत रखने को कहा। महर्षि अंगिरा के कहे अनुसार, उस बहेलिए ने पापांकुशा एकादशी का व्रत किया और किए गए अपने सारे बुरे कर्मों से छुटकारा पा लिया। इस व्रत पूजन के फल और भगवान की कृपा से बहेलिया विष्णु लोक को गया। जब यमराज के यमदूत ने यह चमत्कार देखा तो वह बहेलिया को अपने साथ लिए बिना ही यमलोक वापस चले गए।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। 

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें