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Eid-Ul-Adha 2024: किस दिन है बकरीद, जानें इस दिन का महत्व

Bakrid know the importance -ईद उल फितर के बाद आता है ईद उल अजहा का त्योहार। इस्लाम धर्म में बकरीद का खास महत्व है। इसे कुर्बानी का त्यौहार भी कहा जाता है। बकरीद से लेकर तीन दिन तक लोग  कुर्बानी देते ह

Anuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीWed, 12 June 2024 01:39 PM
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ईद उल फितर के बाद आता है ईद उल अजहा का त्योहार। इस्लाम धर्म में बकरीद का खास महत्व है। इसे कुर्बानी का त्यौहार भी कहा जाता है। बकरीद से लेकर तीन दिन तक लोग  कुर्बानी देते हैं। इस साल ईद-उल-अजहा का त्योहार 17 जून को मनाया जाएगा। यह त्योहार दुनियाभर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। ईद उल फितर के बाद ईद उल अजहा इस्लाम में बड़ा त्योहार है। सभी त्योहारों की तरह इस त्योहार में भी कई रीति रिवाद और परंपरा होती हैं। एक तरफ मस्जिदों में नमाज अदा की जाती है। उनका अल्लाह में विश्वास को दर्शाता है। इस बार ईद-उल-अजहा का चांद 10 जून को दिख गया है, दरअसल इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने जिल हिज्जा की शुरुआत हो गई। जिल हिज्जा की दसवीं तारीख को बकरीद बनाया जाता है। 

बकरीद के दिन लोग बकरे की कुबार्नी देते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पैगंबर हजरत इब्राहिम ने इस दिन अपने बेटे की कुर्बानी दी थी। बकरीद के दिन जिस बकरे की कुर्बानी दी जाती है, उसे अकेले इस्तेमाल नहीं करते। उसको तीन भागों में बांटा जाता है। ऐसे गरीब लोग जो कुर्बानी नहीं दे पाते एक हिस्सा उन्हें दिया जाता है। इसके बाद अपने रिश्तेदारों और तीसरी हिस्सा अपने लिए रखा जाता है।

क्यों मनाया जाता है बकरीद
आपको बता दें कि इस्लाम धर्म की मान्यताओं के मुताबिक एक बार अल्लाह ने पैगंबर हजरत इब्राहिम के सपने में आकर उनसे उनकी एक प्यारी चीज मांगी। अल्लाह ने कहा कि  पैगंबर हजरत इब्राहिम अपने सबसे प्यारी चीज कुर्बान करें। पैगंबर हजरत इब्राहिम अपने बेटे को बहुत प्यार करते थे, इसलिए उन्होंने अल्लाह के लिए अपने बेटे को कुर्बान करने का फैसला लिया। उनसे वो मंजर देखा नहीं जाता , इसलिए उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली। उन्होंने  जिससे उनका पुत्र मोह आल्हा की राह में बाधा नहीं बने। इसके बाद उन्होंने  अपने बेटे की कुर्बानी दे दी, लेकिन जैसे ही उन्होंने अपनी आंखों से पट्टी हटाई तो देखा उनका बेटा इस्माइल सही सलामत  था और उसकी जगह एक दुम्ब अर्थात भेड़ कुर्बान हो गया था। तभी से लोग इस दिन बकरे की कुर्बानी देते हैं।

 

 

 

 

 

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