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पंचांग-पुराणEid Mubarak 2021: अल्लाह के शुक्र का दिन है ईद, दुआएं बटोरने और दूसरों के लिए दुआएं बांटने का पाक दिन

 डॉ. मुफ़्ती मुकर्रम अहमद,नई दिल्लीPublished By: Anuradha Pandey
Tue, 11 May 2021 02:53 PM
Eid Mubarak 2021: अल्लाह के शुक्र का दिन है ईद, दुआएं बटोरने और दूसरों के लिए दुआएं बांटने का पाक दिन

ईद अल्लाह की इबादत का दिन है। 1442 साल से इसे मनाया जा रहा है। इस दिन अल्लाह का शुक्र हरेक के लिए बरसता है। यह दिन अपने लिए दुआएं बटोरने और दूसरों के लिए दुआएं बांटने का पाक दिन है। 

ईद का त्योहार मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार है। इसे ईद-उल-फितर कहा जाता है। ईद रमजान के रोजों के बाद, जो चांद निकलता है, उसके पहले दिन मनाई जाती है। पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद  स. ने तमाम मुसलमानों को यह हुक्म दिया है कि वे दो त्योहार मनाएं। एक, ईद-उल-फितर, दूसरा ईद-उल-अजहा। 1442 साल से यह त्योहार बराबर मुसलमान सारी दुनिया में मनाते हैं और यह एक तरह से अल्लाह की इबादत का दिन है। अल्लाह के शुक्र का दिन है। दुआ करने का दिन है। दूसरों की दुआएं लेने का दिन है। प्यार-मोहब्बत बांटने का दिन है।

ईद वाले दिन मुसलमान अच्छे कपड़े पहनकर, पाक-साफ होकर अल्लाह की तकबीर पढ़ते हुए ईदगाह या मस्जिदों की तरफ जाते हैं। वहां पर इमाम के साथ ईद की दो रकात नमाज पढ़ते हैं और अल्लाह ताला से दुआ करते हैं, गले मिलते हैं, एक-दूसरे को बधाई देते हैं। सेवइयां और मीठी चीजें घरों में बनाई जाती हैं। दोस्तों को मिठाई पेश की जाती है। ईद मिलने लोग अपने रिश्तेदारों के घर जाते हैं और अपने से छोटों को ईदियां बाटते हैं। इसका मतलब यह है कि मुसलमानों का यह त्योहार अल्लाह के नाम से शुरू होता है। यह अल्लाह के ईनाम का दिन होता है। यह मिठाइयां बांटने और खाने-खिलाने का दिन होता है। हर मुसलमान ईद की नमाज से पहले या ईद की नमाज के बाद फितरा गरीबों को देता है। तकरीबन पचास या सौ रुपए अपने परिवार के हर आदमी की तरफ से गरीबों को दिया जाता है । यह वाजिब है ।  इसको सदका फितर कहा जाता है और यह वाजिब है। वाजिब का मतलब यह जरूरी है। इतना कम से कम देना जरूरी है। इसका मतलब गरीबों को अपनी ईद में शामिल करना है।

ईद का दिन अल्लाह के शुक्र का दिन है। हमने जो रमजान में रोजे रखे, सदका-खैरात किया, जकात अदा की, इबादतें कीं और उसमें जो अल्लाह की तरफ से सवाब मिला, उस पर अल्लाह का शुक्र मुसलमान करते हैं और खुशी मनाते हैं। कहा जाता है कि जिसने रमजान में रोजे नहीं रखे वो ईद मनाने का हकदार नहीं होता। लेकिन आजकल कोरोना की वजह से मस्जिदों में नमाज पढ़ने की पाबंदी है। लिहाजा लोगों से अपील की है कि वे घरों में इबादत करें। घरों में ईद की नमाज की जगह सुबह के वक्त चार रकात नमाज चाश्त पढ़ें। यह ईद की जगह पर हो जाएगी और अल्लाह से दुआ करें कि बीमारी दूर हो। जकात और फितरा के अलावा कोरोना मरीजों की मदद करें। गले मिलने और हाथ मिलाने से बचें। बाकी सब करें और ईद मनाएं। उज्र की हालत में मस्जिद में न जाने की इजाजत है। 

चूंकि यह दुआ का दिन है इसलिए दुआ करें। सबसे जरूरी बात यह है कि ईद के बाद भी अपने नेक कामों को जारी रखें। रमजान में बन्दों को जो अल्लाह का ईनाम मिला है, उसे जाया न करें। रमजान रूहानी ट्र्रेंनग का महीना है। इसे पूरे जीवन में अपनाना है। रमजान में रोजा तन के साथ-साथ मन का भी होता है।
(लेखक फतेहपुरी मस्जिद, चांदनी चौक, दिल्ली में शाही इमाम हैं।)


 

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