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ईस्टर : फिर से जीवित हो उठे प्रभु यीशु, लोगों में जागी नई उम्मीद

ईस्टर खुशी का दिन है। इसे खजूर संडे भी कहते हैं। ईस्टर को क्रिसमस की तरह मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार सूली पर लटकाए जाने के तीसरे दिन ईस्टर पर प्रभु यीशु फिर से जीवित हो गए थे। फिर से जीवित होने के बाद प्रभु यीशू 40 दिन तक अपने शिष्यों के साथ रहे और अंत में स्वर्ग को चले गए।

ईस्टर शब्द की उत्पत्ति ईस्त्र शब्द से हुई। ईस्टर रविवार के पहले सभी गिरजाघरों में रात्रि जागरण तथा अन्य धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। ईस्टर की आराधना सुबह महिलाओं द्वारा की जाती है। इसी वक्त प्रभु यीशु का पुन: आगमन हुआ था। प्रभु यीशु को सबसे पहले मरियम मगदलीनी नामक महिला ने देखा और अन्य महिलाओं को इस बारे में बताया था। ईस्टर संडे के अवसर पर प्रभु यीशू के आगमन के इंतजार में प्रार्थना सभाएं होती हैं। प्रभु यीशू को जिस दिन सूली पर चढ़ाया गया, उसे गुड फ्राइडे कहा जाता है। प्रभु यीशू के फिर से जीवित होने से लोगों में नई उम्मीदें जगी। इस दिन को ईस्टर कहा गया। इस अवसर पर अंडे को शुभ माना जाता है और ईस्टर में खास तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाता है। चित्रकारी कर इसे सजाकर गिफ्ट के रूप में एक दूसरे को दिया जाता है। इस दिन दुनियाभर के लोग मानव कल्याण के कार्यों को बढ़ावा देकर दान करते हैं।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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  • Web Title:Easter