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30 अक्तूबर, 2020|3:05|IST

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Dussehra 2020: माता पार्वती के श्राप के कारण पूर्व जन्म में मेंढक थीं मंदोदरी, पौराणिक कथा से जानें कैसे हुआ उनका रावण संग विवाह

दशहरा या विजयादशमी का त्योहार 25 अक्टूबर 2020 को मनाया जा रहा है। इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। तभी से दशहरा मनाने की परंपरा है। क्या आप जानते हैं कि रावण की पति पत्नी पूर्व जन्म में मंदोदरी थीं। पौराणिक कथा को पढ़कर रावण और मंदोदरी के विवाह के पीछे की कहानी-

एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार मधुरा नामक अप्सरा कैलाश पर्वत पर पहुंची। माता पार्वती को वहां ना पाकर अप्सरा ने भगवान शिव को आकर्षित करने का प्रयत्न किया। तभी माता पार्वती वहां आ जाती है और क्रोध में अप्सरा को 12 साल तक मेंढक बनकर कुएं में रहने का श्राप दे देती हैं। भगवान शिव के मनाने पर भी देवी पार्वती श्राप को वापस नहीं लेती हैं। माता पार्वती मधुरा से कहती हैं कि कठोर तप के बाद ही वह अपने असल रूप में वापस आ सकती है।

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मधुरा लंबे समय तक कठोर तप करती हैं। इसी दौरान असुरों के देवता मयासुर और उनकी अप्सरा पत्नी हेमा पुत्री की प्राप्ति की तपस्या करते हैं। अपने कठोर तप से मधुरा श्राप से मुक्त हो जाती है। एक दिन मयासुर और हेमा को मधुरा की कुएं से आवाज सुनाई देती है। मयासुर मधुरा को कुएं से निकालते हैं और बेटी के रूप में गोद ले लेते हैं। मयासुर अपनी गोद ली पुत्री का नाम मंदोदरी रखते हैं। जिनका विवाह बाद में रावण के साथ होता है।

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रावण-मंदोदरी विवाह-

एक बार रावण, मयासुर से मिलने आया और वहां उनकी खूबसूरत पुत्री को देखकर उस पर मंत्रमुग्ध हो गया। रावण ने मंदोदरी से विवाह करने की इच्छा जाहिर की, जिसे मायासुर ने ठुकरा कर दिया। लेकिन रावण ने हार नहीं मानी और जबरन मंदोदरी से विवाह कर लिया।

मंदोदरी जानती थी कि रावण अत्यंत शक्तिशाली है, इसलिए अपने पिता की सुरक्षा के लिए वह रावण के साथ विवाह करने के लिए तैयार हो गई। रावण और मंदोदरी के तीन पुत्र हुए, अक्षय कुमार, मेघनाद और अतिकाय।

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  • Web Title:Dussehra 2020 Rani mandodari janam katha Story of ravan mandodari vivah on festival of Vijayadashami