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30 मई, 2020|4:46|IST

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समुद्रमंथन से निकले 14 रत्नों के पीछे हैं ये संदेश, कलियुग में भी है इनका महत्व 

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विष्णुपुराण में समुद्र मंथन का उल्लेख मिलता हैl इसमें उल्लेखित कहानी के अनुसार एक बार महर्षि दुर्वासा के श्राप के कारण स्वर्ग श्रीहीन (ऐश्वर्य, धन, वैभव आदि) हो गयाl तब सभी देवता भगवान विष्णु के पास गएl भगवान विष्णु ने उन्हें असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने का उपाय बताया और ये भी बताया कि समुद्र मंथन से अमृत निकलेगा, जिसे ग्रहण कर तुम अमर हो जाओगेl यह बात जब देवताओं ने असुरों के राजा बलि को बताई, तो वे भी समुद्र मंथन के लिए तैयार हो गएl वासुकि नाग की नेती बनाई गई और मंदराचल पर्वत की सहायता से समुद्र को मथा गयाl समुद्र मंथन से उच्चैश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, लक्ष्मी, भगवान धन्वन्तरि सहित 14 रत्न निकलेl


कालकूट विष
समुद्र मंथन से सबसे पहले कालकूट विष निकला, जिसे भगवान शिव ने ग्रहण कर लियाl इससे तात्पर्य है कि अमृत (परमात्मा) हर इंसान के मन में स्थित हैl अगर हमें अमृत की इच्छा है तो सबसे पहले हमें अपने मन को मथना पड़ेगाl जब हम अपने मन को मथेंगे तो सबसे पहले बुरे विचार ही बाहर निकलेंगेl यही बुरे विचार विष हैl हमें इन बुरे विचारों को परमात्मा को समर्पित कर देना चाहिए और इनसे मुक्त हो जाना चाहिएl


कामधेनु
समुद्र मंथन में दूसरे क्रम में निकली कामधेनुl वह अग्निहोत्र (यज्ञ) की सामग्री उत्पन्न करने वाली थीl इसलिए ब्रह्मवादी ऋषियों ने उसे ग्रहण कर लियाl कामधेनु प्रतीक है मन की निर्मलता कीl क्योंकि विष निकल जाने के बाद मन निर्मल हो जाता हैl ऐसी स्थिति में ईश्वर तक पहुंचना और भी आसान हो जाता हैl


उच्चैश्रवा घोड़ा
समुद्र मंथन के दौरान तीसरे नंबर पर उच्चैश्रवा घोड़ा निकलाl इसका रंग सफेद थाl इसे असुरों के राजा बलि ने अपने पास रख लियाl लाइफ मैनेजमेंट की दृष्टि से देखें तो उच्चैश्रवा घोड़ा मन की गति का प्रतीक हैl मन की गति ही सबसे अधिक मानी गई हैl यदि आपको अमृत (परमात्मा) चाहिए तो अपने मन की गति पर विराम लगाना होगाl तभी परमात्मा से मिलन संभव हैl


ऐरावत हाथी
समुद्र मंथन में चौथे नंबर पर ऐरावत हाथी निकला, उसके चार बड़े-बड़े दांत थेl उनकी चमक कैलाश पर्वत से भी अधिक थीl ऐरावत हाथी को देवराज इंद्र ने रख लियाl ऐरावत हाथी प्रतीक है बुद्धि का और उसके चार दांत लोभ, मोह, वासना और क्रोध काl चमकदार (शुद्ध व निर्मल) बुद्धि से ही हमें इन विकारों पर काबू रख सकते हैंl


कौस्तुभ मणि
समुद्र मंथन में पांचवें क्रम पर निकली कौस्तुभ मणि, जिसे भगवान विष्णु ने अपने ह्रदय पर धारण कर लियाl कौस्तुभ मणि प्रतीक है भक्ति काl जब आपके मन से सारे विकार निकल जाएंगे, तब भक्ति ही शेष रह जाएगीl यही भक्ति ही भगवान ग्रहण करेंगेl


कल्पवृक्ष
समुद्र मंथन में छठें क्रम में निकला इच्छाएं पूरी करने वाला कल्पवृक्ष, इसे देवताओं ने स्वर्ग में स्थापित कर दियाl कल्पवृक्ष प्रतीक है आपकी इच्छाओं काl कल्पवृक्ष से जुड़ा लाइफ मैनेजमेंट सूत्र है कि अगर आप अमृत (परमात्मा) प्राप्ति के लिए प्रयास कर रहे हैं तो अपनी सभी इच्छाओं का त्याग कर देंl मन में इच्छाएं होंगी तो परमात्मा की प्राप्ति संभव नहीं हैl


रंभा अप्सरा
समुद्र मंथन में सातवें क्रम में रंभा नामक अप्सरा निकलीl वह सुंदर वस्त्र व आभूषण पहने हुई थींl उसकी चाल मन को लुभाने वाली थीl ये भी देवताओं के पास चलीं गईl अप्सरा प्रतीक है मन में छिपी वासना काl जब आप किसी विशेष उद्देश्य में लगे होते हैं तब वासना आपका मन विचलित करने का प्रयास करती हैंl उस स्थिति में मन पर नियंत्रण होना बहुत जरूरी हैl


देवी लक्ष्मी
समुद्र मंथन में आठवें स्थान पर निकलीं देवी लक्ष्मीl असुर, देवता, ऋषि आदि सभी चाहते थे कि लक्ष्मी उन्हें मिल जाएं, लेकिन लक्ष्मी ने भगवान विष्णु का वरण कर लियाl लाइफ मैनेजमेंट के नजरिए से लक्ष्मी प्रतीक है धन, वैभव, ऐश्वर्य व अन्य सांसारिक सुखों काl जब हम अमृत (परमात्मा) प्राप्त करना चाहते हैं तो सांसारिक सुख भी हमें अपनी ओर खींचते हैं, लेकिन हमें उस ओर ध्यान न देकर केवल ईश्वर भक्ति में ही ध्यान लगाना चाहिएl

 

वारुणी देवी
समुद्र मंथन से नौवें क्रम में निकली वारुणी देवी, भगवान की अनुमति से इसे दैत्यों ने ले लियाl वारुणी का अर्थ है मदिरा यानी नशाl यह भी एक बुराई हैl नशा कैसा भी हो शरीर और समाज के लिए बुरा ही होता हैl परमात्मा को पाना है तो सबसे पहले नशा छोड़ना होगा तभी परमात्मा से साक्षात्कार संभव हैl


चंद्रमा
समुद्र मंथन में दसवें क्रम में निकले चंद्रमाl चंद्रमा को भगवान शिव ने अपने मस्तक पर धारण कर लियाl चंद्रमा प्रतीक है शीतलता काl जब आपका मन बुरे विचार, लालच, वासना, नशा आदि से मुक्त हो जाएगा, उस समय वह चंद्रमा की तरह शीतल हो जाएगाl परमात्मा को पाने के लिए ऐसा ही मन चाहिएl ऐसे मन वाले भक्त को ही अमृत (परमात्मा) प्राप्त होता हैl

 

पारिजात वृक्ष 
इसके बाद समुद्र मंथन से पारिजात वृक्ष निकलाl इस वृक्ष की विशेषता थी कि इसे छूने से थकान मिट जाती थीl यह भी देवताओं के हिस्से में गयाl लाइफ मैनेजमेंट की दृष्टि से देखा जाए तो समुद्र मंथन से पारिजात वृक्ष के निकलने का अर्थ सफलता प्राप्त होने से पहले मिलने वाली शांति हैl जब आप (अमृत) परमात्मा के इतने निकट पहुंच जाते हैं तो आपकी थकान स्वयं ही दूर हो जाती है और मन में शांति का अहसास होता हैl

 

पांचजन्य शंख
समुद्र मंथन से बारहवें क्रम में पांचजन्य शंख निकलाl इसे भगवान विष्णु ने ले लियाl शंख को विजय का प्रतीक माना गया है साथ ही इसकी ध्वनि भी बहुत ही शुभ मानी गई हैl जब आप अमृत (परमात्मा) से एक कदम दूर होते हैं तो मन का खालीपन ईश्वरीय नाद यानी स्वर से भर जाता हैl इसी स्थिति में आपको ईश्वर का साक्षात्कार होता हैl


भगवान धन्वंतरि व अमृत कलश
मंथन से सबसे अंत में भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर निकलेl भगवान धन्वंतरि प्रतीक हैं निरोगी तन व निर्मल मन केl जब आपका तन निरोगी और मन निर्मल होगा तभी इसके भीतर आपको परमात्मा की प्राप्ति होगीl समुद्र मंथन में 14 नंबर पर अमृत निकलाl इस 14 अंक का अर्थ है ये है 5 कमेंद्रियां, 5 जननेन्द्रियां तथा अन्य 4 हैं- मन, बुद्धि, चित्त और अहंकारl इन सभी पर नियंत्रण करने के बाद में परमात्मा प्राप्त होते हैंl

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  • Web Title:Do you know secrets behind 14 stones in samundramanthan