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मंत्र याद नहीं तो अपनी भाषा में करें उपासना


कोई भी मनुष्य बिना उपासना के नहीं रह सकता, वह या तो संसार की उपासना करेगा या ईश्वर की। जातक अगर वेद मंत्र के भावार्थ के साथ ईश्वर की उपासना करता है तो उससे अच्छा कुछ हो ही नहीं सकता। इस प्रकार उपासना करने वाले को प्रभु जरूर लाभ फल देते हैं।

शास्त्रों में कहा गया है कि अगर किसी साधक को मंत्र कंठस्त नहीं है लेकिन वह अपनी भाषा में अनुवाद कर पूजा-अर्चना करता है तो भी उसे लाभ मिलता है। ईश्वर की पूजा अवश्य लाभ देती है, बस श्रद्धा की जरूरत है।
यदि कोई साधर उपासना में बैठा है लेकिन उसका ध्यान आसपास के वातावरण में भटक रहा है तो माना जाता है कि उसकी उपासना का केंद्र बदल जाता है। इसलिए उपासना की सूक्ष्मता को समझकर  दृढ़ता से और रुचि से  ईश्वर की उपासना करें।

वेदमंत्रों का अर्थ समझना अनिवार्य

प्रभु की उपासना वेद मंत्रों से ही करनी चाहिए लेकिन शास्त्रों में ही कहा गया है कि अगर आपको मंत्र का अर्थ नहीं पता है तो आपका परिश्रम बिना फल के वृक्ष जैसा है। इसलिए मंत्रों का अर्थ समझना जरूरी है। खास बात यह है कि अर्थ समझकर आप अपनी भाषा में भी भगवान की प्रार्थना कर सकते हैं। बस जरूरत है तो सिर्फ शुद्ध विचारों की।

(इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

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  • Web Title:Do not remember the mantra worship in your own language