do not give up keep trying you will get success - सक्सेस मंत्र: कुछ भी हो जाए कभी हार मत मानो DA Image
16 नबम्बर, 2019|4:08|IST

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सक्सेस मंत्र: कुछ भी हो जाए कभी हार मत मानो

success story

सितम्बर 1921 में पैदा हुए पॉल स्मिथ को 'स्पास्टिक सेरिब्रल पाल्सी' नाम की एक बिमारी थी। जिसका मलतब है, बचपन से ही उनका अपने चेहरे पे, अपने अंगो पे, बोली पे उनका नियंत्रण नहीं था। इसी वजह से वो खुद से नहाना, कपडे पहनना, या खाना खाने जैसे काम भी नहीं कर सकते थे। वो खुद को ढंग से व्यक्त नहीं कर सकते थे, और वो स्कूल भी नहीं जा सकते थे।

पर पॉल स्मिथ जैसे लोग यह साबित करते है कि अगर मन में कुछ करने की इच्छा है, तो बड़ी से बड़ी समस्या आपको नहीं रोक सकती। पॉल को पेन्टिंग करने का शौक था। और इतनी समस्या के बावजूद कुछ नया करने का जूनून था। इसी हिम्मत और साहस के साथ उन्होंने शुरुआत की 'टाइपराइटर पेन्टिंग' की।
 
सोचो वो ढंग से key भी नहीं दबा सकते थे। अपने बाए हाथ से अपने दाये हाथ को पकड़ के Key दबाते थे। और करते थे टाइपराइटर पे पेन्टिंग।

क्योंकि वो ज्यादा Key नहीं दबा सकते थे तो उन्होंने सिर्फ सरल keys का उपयोग करके पेन्टिंग बनानी शुरू की। सिर्फ सरल keys उपयोग करके उन्होंने टाइपराइटर से ऐसी-ऐसी पेंटिंग्स बनाई की दुनिया हैरान रह गई। उन्होंने ऐसी 400 से भी ज्यादा पेन्टिंग्स बनाई, सिर्फ टाइपराइटर की कुछ keys को उपयोग करके।

एक से बढकर एक पेन्टिंग बना कर उन्होंने यह साबित किया कि विकलांगता सिर्फ दिमाग में होती है। उन्होंने अपने विकलांगता पर ध्यान देने के जगह अपनी योग्यता के साथ अपनी एक पहचान बनाई अपना एक नाम बनाया।

सितम्बर 1921 में पैदा हुए पॉल स्मिथ को 'स्पास्टिक सेरिब्रल पाल्सी' नाम की एक बिमारी थी। जिसका मलतब है, बचपन से ही उनका अपने चेहरे पे, अपने अंगो पे, बोली पे उनका नियंत्रण नहीं था। इसी वजह से वो खुद से नहाना, कपडे पहनना, या खाना खाने जैसे काम भी नहीं कर सकते थे। वो खुद को ढंग से व्यक्त नहीं कर सकते थे, और वो स्कूल भी नहीं जा सकते थे।

पर पॉल स्मिथ जैसे लोग यह साबित करते है कि अगर मन में कुछ करने की इच्छा है, तो बड़ी से बड़ी समस्या आपको नहीं रोक सकती। पॉल को पेन्टिंग करने का शौक था। और इतनी समस्या के बावजूद कुछ नया करने का जूनून था। इसी हिम्मत और साहस के साथ उन्होंने शुरुआत की 'टाइपराइटर पेन्टिंग' की।
 
सोचो वो ढंग से key भी नहीं दबा सकते थे। अपने बाए हाथ से अपने दाये हाथ को पकड़ के Key दबाते थे। और करते थे टाइपराइटर पे पेन्टिंग।

क्योंकि वो ज्यादा Key नहीं दबा सकते थे तो उन्होंने सिर्फ सरल keys का उपयोग करके पेन्टिंग बनानी शुरू की। सिर्फ सरल keys उपयोग करके उन्होंने टाइपराइटर से ऐसी-ऐसी पेंटिंग्स बनाई की दुनिया हैरान रह गई। उन्होंने ऐसी 400 से भी ज्यादा पेन्टिंग्स बनाई, सिर्फ टाइपराइटर की कुछ keys को उपयोग करके।

एक से बढकर एक पेन्टिंग बना कर उन्होंने यह साबित किया कि विकलांगता सिर्फ दिमाग में होती है। उन्होंने अपने विकलांगता पर ध्यान देने के जगह अपनी योग्यता के साथ अपनी एक पहचान बनाई अपना एक नाम बनाया।

तो कुछ भी हो जाए कभी हार मत मानो।

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