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Diwali 2023 Lakshmi Pujan Time today :आज स्थिर लग्न में पूजा से आएंगी मां लक्ष्मी, चौघड़िया मुहूर्त, घर में दुकान में पूजा time, सब कुछ यहां पढ़ें

What are Diwali Lakhsmi Puja time 2023: धर्म शास्त्रो के अनुसार दीपावली के पूजन में प्रदोष काल विशेष महत्त्व होता है | दिन-रात के संधि काल को ही प्रदोष काल कहते है , जहाँ दिन श्री हरि विष्णु स्वरुप है

Diwali 2023 Lakshmi Pujan Time today  :आज स्थिर लग्न में पूजा से आएंगी मां लक्ष्मी, चौघड़िया मुहूर्त, घर में दुकान में पूजा time, सब कुछ यहां पढ़ें
Anuradha Pandeyज्योतिर्विद पं दिवाकर त्रिपाठी,नई दिल्लीSun, 12 Nov 2023 07:42 PM
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Diwali Lakshmi Pujan time kya hai: दीपावली का प्रसिद्ध पर्व कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अमावस्या 12 नवंबर 2023 दिन रविवार को बड़े ही श्रद्धा भाव एवं हर्षोल्लास के साथ पुरे विश्व में मनाया जायेगा | श्री महागणपति , महालक्ष्मी एवं महाकाली की पौराणिक अथवा तांत्रिक विधि से साधना-उपासना का परम पवित्र पर्व दीपावली ,उद्योग-धंधे के साथ-साथ नवीन कार्य करने एवं पुराने व्यापार में खाता पूजन का विशेष विधान है | 

Diwali Amavasya tithi
दीपावली कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या को मनायी जाती है । अमावस्या तिथि 12 नवम्बर 2023 दिन रविवार को दिन में 2:12 बजे से आरंभ होकर अगले दिन अर्थात 13 नवम्बर 2023 दिन सोमवार को दोपहर 2:41 बजे तक व्याप्त रहेगा। इस प्रकार इस वर्ष अमावस्या की सम्पूर्ण रात 12 नवम्बर को है। इसके अतिरिक्त इस अमावस्या तिथि के आरम्भ के साथ रात में 3:22 बजे तक स्वाती नक्षत्र तथा सूर्योदय से सायं 5:38 बजे तक आयुष्यमान योग तदुपरि सौभाग्य योग पूरी रात व्याप्त रहेगी। साथ ही रविवार को ही प्रदोष काल का भी बहुत ही उत्तम संयोग मिल रहा है | धर्म शास्त्रो के अनुसार दीपावली के पूजन में प्रदोष काल विशेष महत्त्व होता है | दिन-रात के संधि काल को ही प्रदोष काल कहते है , जहाँ दिन श्री हरि विष्णु स्वरुप है वहीँ रात माता लक्ष्मी स्वरुपा है ,दोनों के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहा जाता है | ध

व्यावसायिक प्रतिष्ठान दिवाली शुभ चौघड़िया पूजा मुहूर्त

● अपराह्न मुहूर्त (शुभ)- 0126 से 0247 बजे तक

● सायंकाल मुहूर्त (शुभ, अमृत, चल)- 0529 से 1026 बजे तक

● रात्रि मुहूर्त (लाभ)- 0144 से 0323 बजे तक

● उषाकाल मुहूर्त (शुभ)- 0502 से 0641 बजे तक

प्रदोष काल
इस प्रकार प्रदोष काल में ही माता लक्ष्मी, भगवान गणेश एवं कुबेर आदि सहित दीपावली पूजन का श्रेष्ठ विधान है तथा प्रदोष काल में ही दीप प्रज्वलित करना उत्तम फल दायक होता है।
प्रदोष काल लगभग शाम 05:25  से 06:45 बजे तक रहेगा | 5:25 से 6:45 तक शुभ नामक शुभ चौघड़िया प्राप्त होने के कारण दीप प्रज्वलित करने के लिए श्रेष्ठ है।
अमावस्या तिथि अर्थात दीपावली में स्थिर लग्न* :- 
(1)- 12 नवंबर दिन रविवार को स्थिर लग्न वृष रात में 05:23 से 7:19 बजे तक । जो अति श्रेष्ठ है एवं प्रदोष काल से युक्त है। साथ ही शुभ चौघड़िया भी है अतः दीप प्रज्वलित करने का श्रेष्ठ मुहुर्त्त।
(2)- 12 नवंबर दिन रविवार को स्थिर लग्न सिंह मध्य रात्रि बाद 11:51 से 2:04 बजे रात तक ।
(3)- 13 दिन सोमवार को स्थिर लग्न वृश्चिक सुबह 6:33 से 08:50 बजे तक प्राप्त होने के कारण इस समय मे माता लक्ष्मी का पूजन शुभफल दायी होता है | सोमवती अमावस्या होने के कारण यह दिन अपने आप में पुण्य दायक हो जाता है।
  
दीपावली पूजन हेतु 12 नवम्बर दिन रविवार को शुभ चौघड़िया समय :- 
(1) रात में 5:25 बजे से 07:03 बजे तक शुभ
(2) रात में 07:03 से 8:41 बजे तक अमृत
(3)रात में 8:41 से 10:23 बजे तक चर
(4) रात में 1:40 से 3:18 बजे तक लाभ
(5) भोर में 4:54 से 06:35 बजे तक चर

13 नवंबर 2023 दिन सोमवार को अर्थात सोमवती अमावस्या के दिन अमावस्या तिथि 2:41 तक व्याप्त रहेगी ऐसे में शुभ चौघड़िया
(1) सुबह 6:35 से 7;57 बजे तक अमृत
(2) सुबह 9:19 से 10:41 बजे तक शुभ
अगर किसी कारण बस वही खातों का पूजन 12 नवंबर को नहीं हो पाया तो उपरोक्त मुहूर्त में वही खातों का पूजन कर सकते हैं।
★ विशेष :- शेष रात भोर में सूप बजाकर दरिद्र का निस्सारण एवं माता लक्ष्मी का पदार्पण कराया जाएगा ।

लक्ष्मी पूजा 2023 सिटीवाइज टाइम
शहर का समय

नोएडा-शाम 05:39 बजे से शाम 07:34 बजे तक
अहमदाबाद- 06:07 PM से 08:06 PM तक
बेंगलुरु 06:03 अपराह्न से 08:05 अपराह्न तक
मुंबई 06:12 PM से 08:12 PM तक
कोलकाता शाम 05:05 बजे से शाम 07:03 बजे तक
चंडीगढ़ शाम 05:37 बजे से शाम 07:32 बजे तक
गुड़गांव शाम 05:40 बजे से शाम 07:36 बजे तक
हैदराबाद 05:52 PM से 07:53 PM तक
जयपुर 05:48 PM से 07:44 PM तक
चेन्नई 05:52 PM से 07:54 PM तक
नई दिल्ली शाम 05:39 बजे से शाम 07:35 बजे तक
पुणे 06:09 PM से 08:09 PM तक

दिवाली सामग्री लिस्ट
पान का पत्ता और सुपारी, केसर, फल, कमलगट्टा, पीली कौड़ियां, धान का लावा, बताशा, मिठाई, खीर, मोदक, लड्डू, पंच मेवा, शहद, इत्र, गंगाजल, दूध, दही, तेल, शुद्ध घी, कलावा, मां लक्ष्मी, गणेश जी, माता सरस्वती और कुबेर देव की मिट्टी की मूर्ति, अक्षत्, लाल फूल, कमल के और गुलाब के फूल, माला, सिंदूर, कुमकुम, रोली, चंदन, कलश, पीतल का दीपक, मिट्टी का दिया, रुई की बत्ती, नारियल, लक्ष्मी और गणेश के सोने या चांदी के सिक्के, धनिया, आम के पत्ते लौंग, इलायची, दूर्वा आदि

प्रदोष काल एवं महानिशीथ काल व्यापिनी अमावश्या में विहित है, जिसमे प्रदोष काल का महत्त्व विशेष रूप से गृहस्थो एवं व्यापारियो के लिए महत्त्वपूर्ण होता है तथा महानिशीथ काल तान्त्रिक क्रियाओं को संपादित करने वालो के लिए उपयुक्त होता है। प्रत्येक वर्ष अमावश्या व्यापिनी महानिशिथ काल में तंत्र साधना हेतु महत्वपूर्ण होता है। 

महानिशीथ काल अर्थात महानिशा काल मध्यरात्रि 11:30 से 12:25 बजे के मध्य है। निशा पूजा, काली पूजा, तांत्रिक पूजा के लिए शुभ चौघड़िया के साथ मध्य रात में 11:14 से बजे से 12:00 बजे तक है जो अति महत्त्वपूर्ण, अति शुभ एवं कल्याण कारक मुहुर्त्त है। स्थिर लग्न सिंह महानिशीथ काल रात मे 11:47 से 2 बजे तक प्राप्त हो रहा है। दिवाली पूजा स्थल को रात भर खाली न छोड़ें ताकि आपके द्वारा जलाए जाने वाले दीपक में जलने के लिए घी या तेल की निरंतर आपूर्ति होती रहे।

सर्वप्रथम घर के पूजा स्थल को अच्छे से साफ करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्रत्त् बिछाएं और वस्त्रत्त् पर अक्षत अर्थात साबुत चावलों की एक परत बिछा दें। इस पर श्री लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा को विराजमान करें। यदि घर में श्रीलक्ष्मी गणेश का चांदी का सिक्का और श्रीयंत्र भी हो तो उन्हें भी इसी आसान पर स्थापित करें। सबसे पहले भगवान गणपति का पूजन करें। इसके बाद महालक्ष्मी का पूजन करें। लक्ष्मी-गणेश के पूजन के लिए घी का एक दीपक बनाएं, अन्य दीयों में सरसों के तेल का प्रयोग कर सकते हैं। सर्वप्रथम घी का दीया प्रज्वलित करें

 

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