Diwali 2019:Know the reason behind offering kheel batashe to goddess laxmi while worshipping her on diwali night - दिवाली पर इस खास वजह से मां लक्ष्मी को चढ़ाए जाते हैं खील-बताशे DA Image
19 नबम्बर, 2019|8:30|IST

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दिवाली पर इस खास वजह से मां लक्ष्मी को चढ़ाए जाते हैं खील-बताशे

kheel batashe

Diwali 2019: हिंदू धर्म में दिवाली को सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। दीपावली का यह पर्व धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक मनाया जाता है। इस बार दीपावली 27 अक्तूबर को मनाई जाएगी। दीपावली  का त्योहार घर में सुख समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद रावण वध करके वापस अयोध्या लौटे थे। इसी खुशी में दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। 

दिवाली के दिन हर घर में लक्ष्मी पूजन किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं। जिनके स्वागत के लिए हर कोई अपने घर को रोशनी से सजाता है। लक्ष्मी पूजन के दौरान पूजा की थाली में खील-बताशे अवश्य रखे जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता लक्ष्मी की पूजा खील बताशों से ही क्यों की जाती है? आइए जानते हैं इसके पीछे की बेहद अहम वजह। 

वास्तविक महत्व-
खील धान से बनते हैं जो चावल का ही एक रूप है। जिसका मतलब यह हुआ कि खील चावल से बनती है। दीपावली आने से कुछ समय पहले यही फसल तैयार होती है।मां लक्ष्मी को इस फसल के पहले भोग के रूप में खील-बताशे चढ़ाए जाते हैं। 

ज्योतिषीय महत्व- 
मां लक्ष्मी की पूजा खील बताशे से करने के पीछे ज्योतिषीय कारण भी है। दीपावली का त्योहार धन और वैभव का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में धन और वैभव का देवता शुक्र ग्रह को माना जाता है। सफेद और मीठी चीजें शुक्र का प्रतीक मानी जाती हैं। यदि किसी व्यक्ति का शुक्र कमजोर है तो वो मां लक्ष्मी को प्रसन्न करके भी शुक्र को अपने अनुरुप कर सकता है। राशि में बैठे शुक्र ग्रह को प्रसन्न करने के लिए लक्ष्मी को खील-बताशे का प्रसाद चढ़ाया जाता है। 

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  • Web Title:Diwali 2019:Know the reason behind offering kheel batashe to goddess laxmi while worshipping her on diwali night