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धनतेरस के दिन इस खास उपाय से घर में विराजमान हो जाएंगी मां लक्ष्मी, घर के बाहर जरूर जलाएं यम का दीपक

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस या धनत्रयोदशी का पर्व मनाया जाता है। इस साल धनतेरस 10 नवंबर 2023, शुक्रवार को है। धनतेरस के दिन सोना-चांदी व बर्तन आदि खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।

धनतेरस के दिन इस खास उपाय से घर में विराजमान हो जाएंगी मां लक्ष्मी, घर के बाहर जरूर जलाएं यम का दीपक
Yogesh Joshiलाइव हिन्दुस्तान,बिजनौरThu, 09 Nov 2023 11:11 PM
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धनतेरस की पूजा के लिए प्रदोष काल को उपयुक्त समय माना जाता है। स्थिर लग्न में धनतेरस की पूजा से लक्ष्मी जी घर में विराजमान रहती हैं। ज्योतिषविदों के अनुसार आज शुक्रवार को शाम 5:47 से 7:43 बजे तक धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त है। दीपावली के त्योहार की शुरुआत धनतेरस से हो जाती है। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहते हैं। धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज, धन के देवता कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा का महत्व है। इस साल धनतेरस 10 नवंबर दिन शुक्रवार पड़ रहा है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन से देवताओं के वैध धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। धनतेरस को साल भर में पड़ने वाले सभी श्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक माना जाता है।

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इस दिन शुभ कार्य करने और खरीदारी करना शुभ माना जाता है। बिजनौर सिविल लाइन स्थित धार्मिक संस्थान ‘विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पण्डित ललित शर्मा ने बताया कि इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 36 मिनट से आरंभ हो जाएगी। समापन 11 नवंबर को दोपहर 01 बजकर 58 मिनट पर होगा। धनतेरस पर पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:47 बजे से 07:43 तक होगा। धनतेरस की पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल में होता है। यदि स्थिर लग्न में धनतेरस की पूजा की जाए तो लक्ष्मी जी घर में ही विराजमान रहती हैं। इसीलिए धनतेरस पूजन के लिए यह समय सबसे उपयुक्त होता है। वृषभ लग्न को स्थिर माना गया है और दीपावली के पर्व के दौरान यह अधिकतर प्रदोषकाल के साथ अधिव्याप्त होता है।

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घर के बाहर जलाते हैं यमराज के लिए दीपक

  • इसी दिन परिवार के किसी भी सदस्य की असामयिक मृत्यु से बचने के लिए मृत्यु के देवता यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है। ऐसी अवधारणा है कि दीपदान से यमदेव प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से सुरक्षा करते हैं।

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