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धनतेरस पर करें मां लक्ष्मी जी के साथ भगवान धन्वतंरि की आरती 

Lakshmi laxmi त्रयोदशी तिथी को धनतेरस पर्व मनाया जाता है।  आज धनतेरस का पर्व है। आज के दिन एक तरफ धन्वंतरि जी की पूजा की जाती है, वहीं इस दिन मां लक्ष्मी की भी विशेष पूजा का विधान है।इसी शुभ दिन धन्

धनतेरस पर करें मां लक्ष्मी जी के साथ भगवान धन्वतंरि की आरती 
Anuradha Pandeyलाइव हिंदुस्तान टीम,नई दिल्लीFri, 10 Nov 2023 08:57 AM
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 कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथी को धनतेरस पर्व मनाया जाता है।  आज धनतेरस का पर्व है। आज के दिन एक तरफ धन्वंतरि जी की पूजा की जाती है, वहीं इस दिन मां लक्ष्मी की भी विशेष पूजा का विधान है।इसी शुभ दिन धन्वतंरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर अवतरित हुए थे। धनतेरस के दिन विभिन्न प्रकार की धातुओं से बनी वस्तुएं खरीदने का भी महत्व है। इसलिए इस दिन मां लक्ष्मी के साथ इनकी आरती करना भी शुभ होने के साथ बीमारियों से दूर रखता है।

Lakshmi ji aarti in hindi

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता

तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन * सेवत हरि विष्णु विधाता

ॐ जय लक्ष्मी माता-2

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता

सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता

ॐ जय लक्ष्मी माता-2

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता

जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता

ॐ जय लक्ष्मी माता-2

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता

कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता

ॐ जय लक्ष्मी माता-2

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता

सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता

ॐ जय लक्ष्मी माता-2

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता

खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता

ॐ जय लक्ष्मी माता-2

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता

ॐ जय लक्ष्मी माता-2

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता

उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता

ॐ जय लक्ष्मी माता-2

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता

तुमको निशदिन सेवत,

मैया जी को निशदिन सेवत हरि विष्णु विधाता

ॐ जय लक्ष्मी माता।

धन्वंतरि जी की Aarti

ॐ नमो भगवते महा सुदर्शनाया वासुदेवाय धन्वन्तरये
अमृत कलश हस्ताय सर्व भय विनाशाय
सर्व रोग निवारणाय त्रैलोक्य पतये
त्रैलोक्य निधये श्री महा विष्णु स्वरूप
श्री धन्वंतरि स्वरुप श्री श्री श्री औषध चक्र नारायणाय स्वाहा ।।

।। भगवान श्री धन्वन्तरी जी की आरती ।।

1- ॐ जय धन्वन्तरि देवा, स्वामी जय धन्वन्तरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा ॥

2- तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

3- आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥


4- भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

5- तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

6- हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥


7- धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐजय धन्वन्तरि जी देवा॥

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