devotees will get more than an hours time for worship on Ahoi Ashtami on 21 october know the date and importance - अहोई अष्टमी पर पूजा के लिए मिलेगा 1.17 घंटे का समय , जानें तिथि और महत्व DA Image
15 नबम्बर, 2019|1:27|IST

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अहोई अष्टमी पर पूजा के लिए मिलेगा 1.17 घंटे का समय , जानें तिथि और महत्व

ahoi ashtami

दिवाली से आठ दिन पहले मनाया जाने वाला अहोई अष्टमी पर्व पर आज महिलाओं को पूजा के लिए 1 घंटा 17 मिनट मिलेंगे। महिलाएं व्रत रखकर आज संतान की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करेंगी। इसको लेकर रविवार को बाजार में चहल-पहल रही।  अहोई अष्टमी का त्योहार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष के आठवें दिन मनाया जाता है। इस दिन शुभ मुहूर्त में अहोई माता की पूजा करने से संतान का जीवन खुशियों से भर जाता है। तथास्तु ज्योतिष संस्थान के आचार्य लवकुश शास्त्री के अनुसार, इस बार अहोई व्रत आज सोमवार को रखा जाएगा। 

अष्ठमी तिथि और पूजा मुहूर्त -
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि प्रारंभ 21 अक्टूबर सुबह 11 बजकर 09 मिनट से शुरू हो जाएगी। यह तिथि 22 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। ऐसे में आज सोमवार को माताएं शाम 05 बजकर 42 मिनट से शाम 06 बजकर 59 मिनट तक पूजा कर सकती हैं। 

महत्व -
पूजा के बाद तारा भी शुभ मुहूर्त में देखना चाहिए। इस दिन तारा शाम 06 बजकर 12 मिनट तक देखा जाएगा। इस मुहूर्त में पूजन करने से संतान की आयु लंबी होती है। महिलाएं पूरा दिन निराहार रहकर रात्रि के समय अहोई माता की पूजा करते हुए अपने बच्चों को मिंट्टी के बर्तनों में मिठाई भर कर देंगी। तथा उनकी लंबी उम्र तथा उनके परिवार के बढ़ने की कामना करेंगी। 

बाजार में रही चहल-पहल :
संतान की दीर्घायु के लिए महिलाओं की ओर से रखे जाने वाले अहोई माता के व्रत को लेकर रविवार को शहर के विभिन्न बाजारों में खरीदारी करने वालों की भीड़ रही। इस व्रत को लेकर शहर में व्रत की सामग्री से संबंधित चीजों को दुकानों में सजाया गया है। अहोई अष्टमी के चलते बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। महिलाओं ने बाजार में अहोई अष्टमी के लिए पूजन सामग्री, कैलेंडर, करवे आदि की खरीदारी की। इसके साथ ही मिट्टी के बर्तनों के अलावा गन्ना, मूली, मिठाई तथा पूजा की अन्य सामग्री खरीदी।

ज्योतिषाचार्य क्या कहते हैं ?
अहोई अष्टमी का वृत संतान की दीर्घायु के लिए रखा जाता है। आज महिलाएं वृत रखेंगी। पूजा के लिए एक घंटे 17 मिनट का समय है। -आचार्य लवकुश शास्त्री, तथास्तु ज्योतिष संस्थान

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