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17 फरवरी, 2020|6:27|IST

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दिवाली की रात मां लक्ष्मी के उलूकवाहिनी नहीं गरुड़वाहिनी रूप की होती है पूजा, जानें क्या है रहस्य

diwali 2019

दीपावली प्रकाश का पर्व है। इस दिन जिस लक्ष्मी की पूजा होती है, वह गरुड़वाहिनी हैं- शक्ति, सेवा और गतिशीलता उनके मुख्य गुण हैं। प्रकाश और अंधकार का नियत विरोध है। अमावस्या की रात को लाख-लाख प्रदीपों को जलाकर हम मां लक्ष्मी के उलूकवाहिनी  रूप की नहीं, गरुड़वाहिनी रूप की उपासना करते हैं।

धार्मिक महत्व-
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार समस्त सृष्टि की आद्याशक्ति  महालक्ष्मी है। वह सत्व, रज और तम तीनों गुणों का समवाय है। वही आद्याशक्ति हैं। वह समस्त विश्व में व्याप्त होकर विराजमान है। वह लक्ष्य और अलक्ष्य, इन दो रूपों में रहती है। लक्ष्य रूप में यह चराचर जगत ही उनका स्वरूप है और अलक्ष्य रूप में यह समस्त जगत की सृष्टि का मूल कारण है। उसी से विभिन्न शक्तियों का प्रादुर्भाव होता है।

तामसिक रूप में वह क्षुधा, तृष्णा, निद्रा, काल रात्रि, महामारी के रूप में अभिव्यक्त होती है। राजसिक रूप में वह जगत का भरण-पोषण करने वाली ‘श्री’ के रूप में उन लोगों के घर में आती हैं, जिन्होंने पूर्व-जन्म में शुभ कर्म किए होते हैं, परंतु यदि इस जन्म में उनकी वृत्ति पाप की ओर जाती है, तो वह भयंकर अलक्ष्मी बन जाती है। सात्विक रूप में वह महाविद्या, महावाणी, भारती, वाक्, सरस्वती के रूप में अभिव्यक्त होती है। मूल आद्याशक्ति ही महालक्ष्मी हैं।

शास्त्रों में ऐसे वचन भी मिल जाते हैं, जिनमें महाकाली या महासरस्वती को ही आद्याशक्ति कहा गया है। जो लोग हिंदू शास्त्रों की पद्धति से परिचित नहीं होते, वे साधारणत: इस प्रकार की बातों को देख कर कह उठते हैं कि यह ‘बहुदेववाद’ है। जो लोग हिंदू शास्त्रों की थोड़ी गहराई में जाना आवश्यक समझते हैं, वे इस बात को कभी नहीं स्वीकार कर सकते। जिन लोगों ने संसार की भरण-पोषण करने वाली वैष्णवी शक्ति को मुख्य रूप से उपास्य माना है, उन्होंने उस आदिभूता शक्ति का नाम ‘महालक्ष्मी’ स्वीकार किया है।

दिवाली पर कहां होती है मां काली की पूजा-
देश के पूर्वी हिस्सों में दिवाली पर महाकाली की पूजा होती है। दोनों बातों में कोई विरोध नहीं है। केवल रुचि और संस्कार के अनुसार आद्याशक्ति के विशिष्ट रूपों पर बल दिया जाता है। पूजा आद्याशक्ति की ही होती है

पूजा का शुभ मुहूर्त-
रविवार को शाम 6 बजकर 4 मिनट से 8 बजकर 36 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त है। व्यापारियों के लिए 8 से दस बजे तक पूजा श्रेष्ठ मानी गई है।

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  • Web Title:Deepawali 2019: Know what is the secret of worshipping Goddess laxmi Garudwahini roop instead of Ulukwahini roop on Diwali night significance of lakshmi pujan subh muhurat and special foods served on diwali