DA Image
25 जनवरी, 2020|8:04|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

Dattatreya Jayanti 2019 : भगवान विष्णु और शिव की विशेष कृपा पाने के लिए करें इस विधि से पूजा, जानें इस व्रत का महत्व और पौराणिक कथा

jyanti

भगवान दत्तात्रेय को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। तो वहीं कुछ मान्यताओं के अनुसार इन्हें भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। माना जाता है कि मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा के दिन दत्तात्रेय जयंती पर पूजा करने पर विष्णु और शिव की कृपा मिलती है. इस बार यह तिथि 11 दिसंबर को पड़ रही है। आइए, जानते हैं इस व्रत का महत्व, पूजन विधि और कथा- 

 

क्या है महत्व 

मान्यताओं के अनुसार दत्तात्रेय जी ने 24 गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की थी और इन्हीं के नाम पर ही दत्त समुदाय का उदय हुआ। दक्षिण भारत में इनका प्रसिद्ध मंदिर भी है। मान्यता है कि इस जयंती पर जो व्यक्ति व्रत रख इनकी विशेष पूजा अर्चना करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों के एक स्वरूप हैं। इसलिए इनकी पूजा से त्रिदेव प्रसन्न हो जाते हैं।

 

भगवान दत्तात्रेय की पूजा विधि
भगवान दत्तात्रेय की उपासना करने के लिए घर के मंदिर या फिर किसी पवित्र स्थान पर इनकी प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें पीले फूल और पीली चीजें अर्पित करें। इसके बाद इनके मन्त्रों का जाप करें। मंत्र इस प्रकार हैं ‘;ॐ द्रां दत्तात्रेयाय स्वाहा’ दूसरा मंत्र ‘ॐ महानाथाय नमः’ मंत्रों के जाप के बाद भगवान से कामना की पूर्ति की प्रार्थना करें। हो सके तो इस दिन एक वेला तक उपवास या व्रत रखें।

 

भगवान दत्तात्रेय के जन्म की कथा 
 पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार तीन देवियों को अपने सतीत्व यानी पतिव्रता धर्म पर अभिमान हो गया। तब भगवान विष्णु ने लीला रची। तब नारद जी ने तीनों लोकों का भ्रमण करते हुए देवी सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती जी के समक्ष अनसूया के पतिव्रता धर्म की प्रशंसा कर दी। इस पर तीनों देवियों ने अपने पतियों से अनसूया के पतिधर्म की परीक्षा लेने का हठ किया।


तब त्रिदेव ब्राह्मण के वेश में महर्षि अत्रि के आश्रम पहुंचे, तब महर्षि अत्रि घर पर नहीं थे। तीन ब्राह्मणों को देखकर अनसूया उनके पास गईं। वे उन ब्राह्मणों का आदरसत्कार करने के लिए आगे बढ़ी तब उन ब्राह्मणों ने कहा कि जब तक वे उनको अपनी गोद में बैठाकर भोजन नहीं कराएंगी, तब तक वे उनकी आतिथ्य स्वीकार नहीं करेंगे। उनके इस शर्त से अनसूया चिंतित हो गईं। फिर उन्होंने अपने तपोबल से उन ब्राह्मणों की सत्यता जान गईं। भगवान विष्णु और अपने पति अत्रि को स्मरण करने के बाद उन्होंने कहा कि यदि उनका पतिव्रता धर्म सत्य है तो से तीनों ब्राह्मण 6 माह के शिशु बन जाएं। अनसूया ने अपने तपोबल से त्रिदेवों को शिशु बना दिया। शिशु बनते ही तीनों रोने लगे।


तब अनसूया ने उनको अपनी गोद में लेकर दुग्धपान कराया और उन तीनों को पालने में रख दिया। उधर तीनों देवियां अपने पतियों के वापस न आने से चिंतित हो गईं। तब नारद जी ने उनको सारा घटनाक्रम बताया। इसके पश्चात तीनों देवियों को अपने किए पर बहुत ही पश्चाताप हुआ। उन तीनों देवियों ने अनसूया से क्षमा मांगी और अपने पतियों को मूल स्वरूप में लाने का निवेदन किया।
 

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Dattatreya Jayanti 2019 know its significance pujan vidhi and mythological story