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19 सितम्बर, 2020|2:29|IST

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दशलक्षर्ण पर्व: मन, वचन और काम की सरलता को कहते हैं आर्जव धर्म

दसलक्षण महापर्व के तृतीय दिन उत्तम आजर्व धर्म को अंगीकार किया जाता है। व्यख्यान वाचस्पति प्रकांड पंडित डा. श्रीयांश जैन तीसरे धर्म आजर्व धर्म के बारे मे जानकारी देते हुए बताया कि योगस्यावक्रर्ता आर्जव अर्थात मन, वचन और काम की सरलता को आर्जव कहते हैं। क्रोध गया, मान गया अब मायाचारी होने से बचने के संकल्प की बारी है। उन्होंने बताया कि योगस्यावक्रर्ता आर्जव अर्थात मन, वचन और काम की सरलता को आर्जव कहते हैं। ऋतुजा का भाव भी आर्जव है।

जीवन में छल कपट बड़ी विकृति है। जो दूसरों को छलता है, उसके सीने में छाले पड़ जाते हैं। जीवन में भीतर-बाहर से सरलता रखिए। मायाचारी और छलकपट व्यक्ति का कभी कल्याण नहीं हो सकता। छल - कपट करने वाले का चित्त हमेशा अशांत रहता है। इसके विपरीत जो सरल मन के हैं, वे निश्चिन्त रहते हैं। उनकी साधना भी सरलता उत्पन्न करती है।

सरलता से आत्मविश्वास, आत्मविश्वास से निडरता, निडरता से दृढ़ता तथा संकल्पशक्ति और संकल्प से कार्य करने की निरंतरता तथा कार्य की निरंतरता से निश्चित सफलता मिलती है। हम कह सकते हैं कि सरलता से सफलता आर्जव धर्म का परिणाम है। जो साधना सरलता पैदा करती है, वही सच्चे अर्थ में साधना है। साधना से पैदा हुई सरलता स्थाई होती है। जो सरल है वही संत है। संत के आनंद में दु:खी जन भी अपना दुख भूल जाते हैं। सन्यास का अर्थ उदासी उदासीनता ही नहीं है।

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  • Web Title:Dashalksarna festival Arjava religion says simplicity of mind speech and work