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सावन 2018 : आखिर क्यों भाता है महादेव को सावन, अभिषेक और बेलपत्र चढ़ाने से कैसे पूरी होती हैं मनोकामनाएं

shravan 2018

कहते हैं भगवान शिव को सावन का महीना बेहद प्रिय है। इस माह में सच्चे मन से जो एक बार शिव की आराधना कर लेता है उसकी सारी मनोकामनाएं भोलेनाथ पूरी कर देते हैं। इस संबंध में पौराणिक कथा है कि जब सनत कुमारों ने महादेव से उन्हें श्रावण महीना प्रिय होने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था।

सावन में पार्वती ने शिव को पाने के लिए किया था तप
अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने युवावस्था के श्रावण महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और शिव जी को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया, जिसके बाद ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया।

सावन में महादेव की पूजा का है खास महत्व
श्रावण के महीने में भगवान शंकर की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दौरान पूजन की शुरुआत महादेव के अभिषेक के साथ की जाती है। अभिषेक में महादेव को जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, गन्ने का रस आदि से स्नान कराया जाता है। अभिषेक के बाद बेलपत्र, समीपत्र, दूब, कुशा, कमल, नीलकमल, ऑक मदार, जंवाफूल कनेर, राई फूल आदि से शिवजी को प्रसन्न किया जाता है। इसके साथ की भोग के रूप में धतूरा, भांग और श्रीफल भी चढ़ाया जाता है।  

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भोलेनाथ के अभिषेक की पौराणिक कथा
समुद्र मंथन के समय हलाहल विष निकलने के बाद महादेव ने इस विष को पी लिया था। इसके प्रभाव से वह मूर्च्छित हो जाते हैं। उनकी दशा देखकर सभी देवी-देवता भयभीत हो जाते हैं और उन्हें होश में लाने के लिए निकट में जो चीजें उपलब्ध होती हैं, उनसे महादेव को स्नान कराने लगते हैं। इसी मान्यता के अनुसार जल से समेत उस समय उन पर चढ़ाई गई हर सामग्री के साथ विषधर का अभिषेक किया जाता है।

बेलपत्र और समीपत्र चढ़ाने की भी है कहानी 
भगवान शिव को भक्त प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र और समीपत्र चढ़ाते हैं। मान्यता है कि जब 89 हजार ऋषियों ने परम पिता ब्रह्मा से महादेव को प्रसन्न करने की विधि पूछी तो उन्होंने बताया कि महादेव सौ कमल चढ़ाने से जितने प्रसन्न होते हैं, उतना ही एक नीलकमल चढ़ाने पर होते हैं। ऐसे ही एक हजार नीलकमल के बराबर एक बेलपत्र और एक हजार बेलपत्र चढ़ाने के फल के बराबर एक समीपत्र का महत्व होता है।

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