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Chhath Puja 2023 Vidhi: अस्तलचलगामी व उदयगामी सूर्यदेव की ऐसे करें पूजा, ज्योतिषाचार्य से जानें खास बातें

Chhath Puja Arghya Time 2023: लोक आस्था का पर्व छठ पूजा 17 नवंबर से प्रारंभ हो गई है। छठ पूजा का पर्व 20 नवंबर तक चलेगा। जानें ज्योतिषाचार्य से छठ पूजा की विधि व अन्य जरूरी बातें-

Chhath Puja 2023 Vidhi: अस्तलचलगामी व उदयगामी सूर्यदेव की ऐसे करें पूजा, ज्योतिषाचार्य से जानें खास बातें
Saumya Tiwariनिज संवाददाता,गोरखपुरFri, 17 Nov 2023 12:14 PM
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Chhath Puja Arghya Time 19 and 20 November 2023: सूर्य उपासना का यह महापर्व छठ 17 नवंबर को नहाय खाय के साथ शुरू होगा। यह खास इसलिए भी है कि यह लोक का पर्व है। पहले डूबते सूर्य को और फिर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य के लिए सूर्य का अस्ताचल की ओर जाना और उदय होना ही मुहूर्त है।

ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय बताते हैं कि सूर्य उपासना का यह पर्व जितना सरल है, उतना ही कठिन भी। सरल इसलिए कि इसमें किसी आचार्य की आवश्यकता नहीं है जबकि कठिन इसलिए कि चार दिन का यह पर्व शुद्धता का प्रतीक भी बन जाता है। इस बार 17 नवंबर शुक्रवार को चतुर्थी तिथि है, इस दिन व्रती स्नान करके सात्विक भोजन ग्रहण करेंगे, जिसे स्थानीय भाषा में नहाय खाय के नाम से जाना जाता है। शनिवार (पंचमी तिथि ) को पूरे दिन व्रत रहकर शाम को प्रसाद ग्रहण किया जाएगा, इसे खरना या लोहंडी कहा जाता है।

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षष्ठी तिथि के दिन रविवार को संध्याकाल में नदी या तालाब के किनारे व्रती सूर्यास्त के समय अनेक प्रकार के पकवानों को बांस के सूप में सजाकर सूर्य को दोनों हाथों से अर्घ्य अर्पित करेंगे। सप्तमी तिथि सोमवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाएगा। इसी दिन व्रत की पूर्णता भी होती है और व्रती द्वारा पारायण किया जाता है। उन्होंने बताया कि यह लोक रीति-रिवाज और ग्रामीण परिवेश पर आधारित है, लेकिन अब बड़े- बड़े पंडाल लगाए जा रहे हैं, जिसमें सूर्यदेव की मूर्ति स्थापित की जा रही है। भजन संध्या आयोजित की जा रही हैं।

वैदिक काल से हो रही है सूर्य उपासना पं. शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि छठ पर्व को मनाने के पीछे कई पौराणिक एवं लोक कथाएं हैं एवं एक लंबा इतिहास है। सूर्य उपासना की परंपरा वैदिक काल से रही है। महाभारत की कथा में सूर्य -उपासना, पूजा का विस्तार वर्णन मिलता है। वैदिक साहित्य में भी सूर्य को सर्वाधिक प्रत्यक्ष देवता माना गया है। छठ पर्व की एक लोकगाथा में द्रौपदी की सूर्य उपासना से प्रभावित होकर भगवान सूर्य ने मनोवांछित फल प्रदान किया था, जिससे पांडवों ने अपना खोया हुआ राज्य फिर प्राप्त कर लिया था।

ऐसे होगी पूजा

ज्योतिषाचार्य जितेंद्र नाथ पाठक के अनुसार 19 नवंबर षष्ठी के दिन घाट पर बनी बेदी पर पूजन सामग्री चढ़ाई व दीप जलाएं। अस्तलचलगामी सूर्य को दीप दिखाकर प्रसाद अर्पित करें। अगले दिन परिवार के साथ घाट पर पहुंचकर पानी में खड़े होकर उगते सूर्य को दीप अर्पित कर जल में प्रवाहित करें और अंजलि से जल अर्पित करें। भगवान सूर्य को प्रसाद अर्पित करें। अपने आंचल में भी प्रसाद को बांधे। प्रसाद वितरण करने के बाद घर पर आकर हवन करें और काली मिर्च व शरबत आदि से व्रत तोड़ें।

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