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23 जनवरी, 2021|10:26|IST

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Chhath Puja 2020: छठ व्रत का मुख्य प्रसाद है ठेकुआ, अर्घ्य में इन चीजों को किया जाता है शामिल

संतान प्राप्ति, पुत्रों के दीघार्यु और यशस्वी होने की मनोकामना पूर्ति के लिए सूर्य उपासना का पर्व छठ कार्तिक मास शुक्ल पक्ष तिथि चतुर्थी यानी 18 नवंबर से शुरू होकर 21 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर समापन होगा।

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छठ व्रत का मुख्य प्रसाद: छठ व्रत का मुख्य प्रसाद ठेकुआ है। यह गेहूं का आटा, गुड़ और देशी घी से बनाया जाता है। प्रसाद को मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर पकाया जाता है। ऋतु फल में नारियल, केला, पपीता, सेब, अनार, कंद, सुथनी, गागल, ईख, सिघाड़ा, शरीफा, कंदा, संतरा, अनन्नास, नींबू, पत्तेदार हल्दी, पत्तेदार अदरक, कोहड़ा, मूली, पान, सुपारी, मेवा आदि का सामर्थ्य के अनुसार गाय के दूध के साथ अर्घ्य दिया जाता है। यह दान बांस के दऊरा, कलसुप नहीं मिलने पर पीतल के कठवत या किसी पात्र में दिया जा सकता है।

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खरना प्रसाद: नहाय-खाय के दूसरे दिन सभी व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखते हैं। सुबह से व्रत के साथ इसी दिन गेहूं आदि को धोकर सुखाया जाता है। दिन भर व्रत के बाद शाम को पूजा करने के बाद व्रती खरना करते हैं। इस दिन गुड़ की बनी हुई चावल की खीर और घी में तैयार रोटी व्रती ग्रहण करेंगे। कई जगहों पर खरना प्रसाद के रूप में अरवा चावल, दाल, सब्जी आदि भगवान भाष्कर को भोग लगाया जाता है। इसके अलावा केला, पानी सिघाड़ा आदि भी प्रसाद के रूप में भगवान आदित्य को भोग लगाया जाता है। खरना का प्रसाद सबसे पहले व्रती खुद बंद कमरे में ग्रहण करते हैं। खरना का प्रसाद मिट्टी के नये चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनाया जाता है। चार दिवसीय उपासना का पर्व 18 नवंबर को नहाय खाय,19 नवंबर को खरना , 2० नवंबर को अस्तचलगामी सूर्य को अर्घ्य और 21 नवंबर को उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर समापन किया जाता है ।

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  • Web Title:Chhath Puja 2020: The main offerings of Chhath Vrat are Thekua these things are used in Arghya