जिले के दाहा नदी पुलवा छठ घाट पर हजारों श्रद्धालु देते हैं अर्घ्य - Chhath Mahaparv: Thousands of devotees offer Arghya at Daha River Pulwa Chhat Ghat in the district DA Image
19 नबम्बर, 2019|8:30|IST

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जिले के दाहा नदी पुलवा छठ घाट पर हजारों श्रद्धालु देते हैं अर्घ्य

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लोकआस्था के महापर्व छठ के दौरान जिले के आंदर प्रखंड के बलिया स्थित सूर्य मंदिर श्रद्धालुओं के बीच आस्था का केन्द्र बना रहता है। सोना नदी के तट पर स्थित सूर्य मंदिर की स्थापना 1901 में हुई थी। छठ के दौरान अस्ताचलगामी व उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दौरान छठ घाटों पर कोसी भरी जाती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु छठ व्रतियों की सेवा के लिये सुबह-शाम तत्पर रहते हैं। सुबह में व्रतियों के लिये दूध व दतुअन उपलब्ध कराया जाता है। वहीं इसके साथ ही घाटों पर उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो इसका भी ख्याल रखा जाता है।

लोकआस्था के महापर्व छठ की तैयारी शहर में शुरू हो गई है। इस क्रम में सबसे पहली तैयारी छठ घाटों की साफ-सफाई कर घाट पर बनी सिरसोप्ता की रंगाई-पुताई से जुड़ा होता है। शहर के सबसे बड़े छठ घाट दाहा नदी पुलवा छठ घाट पर अस्ताचलगामी व उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

दक्खिन दिशा में चार सौ फीट व उत्तर दिशा में ढाई सौ फीट फैले दाहा नदी पुलवा छठ घाट पर छठ व्रत के दौरान दस हजार से भी अधिक श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। घाट का इतिहास सौ साल से भी अधिक पुराना है। नगर परिषद के वार्ड नंबर 13 व 15 से जुड़े दाहा नदी पुलवा छठ घाट पर शहर के अलावा ग्रामीण इलाके से भी बड़ी संख्या में व्रती अर्घ्य देने के लिये पहुंचते हैं। व्रत के दौरान मन्नत पूरी होने पर व्रतियों का भू-परी होकर आना व उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने से पूर्व घाट पर कोसी भरने की वर्षों पुरानी परंपरा रही है।

घाटों का हो रहा अतिक्रमण-
दाहा नदी के तट पर छठ घाट स्थित हैं। छठ घाट होने के बावजूद इनके रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से इनका अतिक्रमण होता जा रहा है। छठ पर्व समाप्त होने के साथ आस्था से जुड़े ये घाट आवारा पशुओं की शरणस्थली बन जाती है। इससे पूजा-पाठ करने आये लोगों को परेशानी होती है।

घाट पर फैला है गंदा पानी-
नगर परिषद के वार्ड नंबर 15 स्थित मोती स्कूल पोखरा का हाल खराब है। यहां पर कचहरी, गांधी मैदान, मालवीय नगर व नई बस्ती की महिलाएं अर्घ्य देने आती हैं। पोखरा में बारिश का गंदा पानी जमा होने से लोग जाने से परहेज कर रहे हैं।

]छठ व्रत को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में सरगर्मी तेज हो गई है। सरयू नदी के एक दर्जन घाटों पर छठ पूजा के अर्ध्य देने को लेकर व्रतियों की भारी भीड़ उमड़ती है। सरयू नदी के गंगपुर सिसवन के शिवाला घाट, अकड़वा घाट,  भगवतीजी घाट, मल्लाह घाट व पाण्डेय घाट पर भारी भीड़ उमड़ती हैं।

 सबसे ज्यादा भीड़ गंगपुर सिसवन के शिवाला घाट पर जुटती है। यहां पर पांच हजार से अधिक लोग छठ पूजा के दिन जुटते हैं। गंगपुर सिसवन के अलावा सरौत,  सिसवन प्रखंड कार्यालय व अन्य जगह के व्रती आते हैं। यहां पर छठ पूजा को लेकर प्रशासन खास चौकस रहता है। स्थानीय व प्रशासनिक स्तर पर जेनरेटर चलाकर लाइट की पर्याप्त व्यवस्था की जाती है। प्रशासन की ओर से एसडीआरएफ की टीम तैनात रहती है। नदी में नौका की व्यवस्था की जाती हैं। सिसवन थाना घाट पर पुलिस बल की व्यवस्था रहती है। इस साल घाट थोड़ा कम खतरनाक है।

पांडेय घाट पर व्यवस्था
सिसवन के मल्लाह घाट व पांडेय घाट पर छठ व्रतियों के लिये युवाओं ने विशेष तैयारी की गई है। पानी उतरने के बाद भी घाट पर कीचड़ व गंदगी जमा है। इससे व्रतियों को पेरशानियों का सामना करना पड़ेगा। शिवाला घाट पर स्थानीय लोगों द्वारा बांस व रस्सा से बैरिकेटिंग की जायेगी।

खतरनाक घाट
एक दर्जन छठ घाटों में दस घाट खतरनाक हैं। इनमें मुख्य रूप से मल्लाह घाट, ग्यासपुर, कठियाबाबा घाट, नौका टोला आदि शामिल है। परेशानी वाली बात यह रहती की प्रशासन सब कुछ जानकर भी अनजान बना रहता है।

आंदर प्रखंड के बलिया पंचायत में सोना नदी के तट पर जिले का इकलौता सूर्य मंदिर है। अन्य दिनों की तुलना में यहां पर चैती व कार्तिक छठ पूजा के दौरान बड़ी संख्या में व्रती अर्ध्य देने पहुंचते हैं।

तत्कालीन बड़वानी स्टेट में इंजीनियर पद पर कार्यरत बाबू देवनाथ सहाय ने 1901 में श्रीराम जानकी मंदिर से सटे सूर्य मंदिर की स्थापना की थी। तभी से यहां छठ पूजा होती है। मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है कि जिले का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां सूर्य देव व चित्रगुप्त भगवान दोनों की मूर्ति है।

बलिया, छजवा, बंगरा व खैरनपुर समेत अन्य गांव के छठ व्रती अस्ताचलगामी व उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सूर्य मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। छठ के दौरान सोना नदी के तट पर स्थित सूर्य मंदिर में 24 घंटे चहल-पहल रहती है। दूर- दराज से आये श्रद्धालुओं के ठहरने के लिये मंदिर परिसर में व्यवस्था रहती है। इस दौरान ग्रामीणों द्वारा घाट व मंदिर पर प्रकाश की व्यवस्था की जाती है।

इकलौता चित्रगुप्त मंदिर
सीवान जिले के आंदर प्रखंड के बलिया में सोना नदी के तट पर सूर्य मंदिर की तरह इकलौता चित्रगुप्त मंदिर है। यहां चित्रगुप्त पूजा के दौरान कायस्त समाज के लोग दूर-दराज से पूजा करने आते हैं। अजय किशोर ने बताया कि मंदिर में भगवान चित्रगुप्त समेत उनके पूरे परिवार की मूर्तियां स्थापित की गई।

एनआरआई करते हैं विकास
सूर्य मंदिर से संबंधित किसी भी तरह का विकास कार्य एनआरआई द्वारा कराया जाता है। मंदिर की देखरेख की व्यवस्था परमानंद वर्मा के बेटे अवधेश वर्मा, अंजनि वर्मा, अनिल वर्मा व अतुल वर्मा द्वारा की जाती है जो कि एनआरआई हैं।

पुत्र प्राप्ति व पुत्र की दीर्घायु की कामना का सूर्योपासना का महापर्व छठ पूजा जिले के दक्षिणी छोर पर स्थित दरौली सरयू नदी के पंचमंदिरा घाट पर होता है।
छठ पर्व में पंचमन्दिरा घाट पर छठव्रतियों का सैलाब उमड़ता है। प्रकृति की गोद में मनोरम, भव्य व आकर्षक यह छठ घाट है। इस घाट पर जिले के मैरवा, दोन, कृष्णपाली, मुड़ा सहित कई गांवों के लोग अस्तागामी व उदयीमान सूर्य को अर्ध्य देने  पहुंचते हैं। छठ पूजा में पंचमन्दिरा घाट व शिवाला घाट को दुल्हन की तरह सजाया जाता है।

वहीं ग्रामीण घाट तक पहुंचने वाले रास्तों को भी आकर्षक ढंग से सजाते हैं। उधर युवकों द्वारा नदी किनारे गंगा मईया की मूर्ति स्थापित किया जाता है। इससे घाट की सुंदरता बढ़ जाती है। इस घाट पर पच्चीस हजार से अधिक छठव्रती सरयू नदी में खड़ा हो सूर्योपासना कर अर्ध्य देते हैं। सूर्य को अर्घ देने के बाद श्रद्धालु पंचमन्दिर में पहुंच कर पूजा पाठ  करते हैं ।

सजाने की है परंपरा
दरौली में छठ घाटों को सजाने की परंपरा रही है। वर्षों से छठ आने के साथ स्थानीय स्तर पर साफ-सफाई शुरू हो जाती है। इसमें युवाओं की भूमिका बढ़-चढ़कर होती है। घाट के साथ ही घाट तक आने वाले सभी रास्ते की सजावट प्रशासन से इतर अन्य लोग आपसी सहयोग के साथ करते हैं।

प्रशासन की रहेगी नजर
छठ घाट के दौरान प्रशासन की नजर खतरनाक घाटों पर विशेष रूप से रहेगी। बीडीओ-सीओ व थानाध्यक्ष की निगरानी में घाटों को चिन्हित करने का कार्य शुरू कर दिया गया। पानी के स्तर को देखते हुये बैरिकेटिंग विशेष रूप से की जायेगी।

पोखरा पर भी देते हैं अर्घ्य
वार्ड नंबर छह स्थित पचमंदिरा पोखरा पर छठ व्रत के दौरान भगवान भाष्कर को छठ व्रती अर्घ्य देते हैं। पोखरा के चारों कोण पर दुर्गा मंदिर, शिव मंदिर, रामजानकी मंदिर समेत पांच  मंदिर है। इसके अलावा शिवर्व्रत साह छठ घाट, श्रीनगर, नवलपुर, महादेवा, मोती स्कूल पोखरा, पर अर्घ्य दिया जाता है।

दाहा नदी में देंगे अर्घ्य
प्रखंड क्षेत्र के बीच से दाहा नदी गुजरती हैं। दाहा नदी के भी दर्जनों घाट पर श्रद्धालु डूबते व उगते व सूरज को अर्ध्य देंगे। दाहा नदी के बखरी, भीखपुर, जगदीशपुर, चैनपुर,  मुबारकपुर, रामगढ़ व बघौना में बड़ी संख्या में व्रती सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा करेंगे। घाटों पर लोगों द्वारा सुरक्षा के प्रबंध किए जाते हैं।

सूर्य मंदिर की है महत्ता
ग्रामीण महेश, नंदकिशोर , डॉ. विनोद वर्मा, कुनकुन श्रीवास्तव, अशोक , नीलेश, मोख्तार , मदन सिंह, पूर्व मुखिया बादशाह, मृत्युजंजय व तेजनारायण  बताते हैं कि सूर्य मंदिर में छठ पूजा की विशेष महत्ता है। कभी गुंबद इतना विशाल था कि सीवान से दिख जाता लेकिन 1934 में आये भूकंप में क्षतिग्रस्त हो गया।

मोड़ पर रोके जाते हैं वाहन
दरौली के पंचमंदिर घाट पर आने के लिये बड़े वाहन थाना मोड़ पर ही रोक दिए जाते हैं। छठ व्रत के दौरान इनका आवागमन घाट से करीब दौ सौ मीटर वाहनों को रोक दिया जाता है, ताकि जाम की समस्या उत्पन्न नहीं हो। शिवाला घाट की रंगाई गेरुआ रंग से की जाती है।
 

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