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chhath puja 2018: नहाय-खाय पर सिद्धियोग और रविवार का संयोग

छठ में श्रद्धालुओं का बिहार जाना हुआ मुश्किल, जानिए क्या है वजह

इस बार छठ महापर्व के चार दिवसीय अनुष्ठान में ग्रह-गोचरों का शुभ संयोग बन रहा है। रविवार को नहाय-खाय पर सिद्धि योग और रविवार का संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य प्रियेंदू प्रियदर्शी के अनुसार रविवार को नहाय-खाय होने से सूर्य पूजन का महत्व सौ गुणा बढ़ गया है। वहीं मंगलवार 13 नवंबर को सायंकालीन अर्घ्य पर अमृत योग व सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग है जबकि प्रात:कालीन अर्घ्य पर बुधवार की सुबह छत्र योग का संयोग बन रहा है। 

गंगा घाटों पर उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़: नहाय-खाय को लेकर रविवार को गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। गंगा घाटों पर सुबह से ही छठव्रती और इनके परिजन पहुंचने लगेंगे। घाटों पर स्नान से पहले व्रती दातुन करेंगे। घाटों पर व्रती प्रसाद बनाने के लिए गेहूं भी सुखायंगे। साथ ही प्रसाद बनाने के लिए बर्तन धोए जाएंगे और गंगाजल भरकर घर लाएंगे। .

अरबा चावल और कद्दू की सब्जी ग्रहण करेंगे व्रती : नहाय-खाय पर रविवार को छठ व्रती गंगा स्नान करेंगे और अरबा चावल,चने की दाल व कद्दू की सब्जी ग्रहण करेंगे। नहाए-खाय के दिन खासतौर पर कद्दू की सब्जी बनायी जाती व व्रती इसे ग्रहण करते हैं। कद्दू में पर्याप्त मात्रा में जल रहता है। लगभग 96 फीसदी पानी होता है। इसे ग्रहण करने से कई तरह की बीमारियां खत्म होती हैं। वहीं चने की दाल भी ग्रहण की जाती है। ऐसी मान्यता है कि चने *की दाल बाकी दालों में सबसे अधिक शुद्ध है। .

आरोग्य की प्राप्ति व संतान के लिए व्रत : ज्योतिषी पीके युग के अनुसार सूर्य षष्ठी का व्रत आरोग्य की प्राप्ति,सौभाग्य व संतान के लिए रखा जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार राजा प्रियव्रत ने भी यह व्रत रखा था। उन्हें कुष्ठ रोग हो गया था। भगवान भास्कर से इस रोग की मुक्ति के लिए उन्होंने छठ व्रत किया था। स्कंद पुराण में प्रतिहार षष्ठी के तौर पर इस व्रत की चर्चा है। वर्षकृत्यम में भी छठ की चर्चा है। .

भगवान भास्कर की मानस बहन हैं षष्ठी देवी : अथर्ववेद के अनुसार भगवान भास्कर की मानस बहन हैं षष्ठी देवी। प्रकृति के छठे अंश से षष्ठी माता उत्पन्न हुई हैं। उन्हें बालकों की रक्षा करने वाले भगवान विष्णु द्वारा रची माया भी माना जाता है। बालक के जन्म के छठे दिन भी षष्ठी मइया की पूजा की जाती है, ताकि बच्चे के ग्रह-गोचर शांत हो जाएं। एक अन्य आख्यान के अनुसार कार्तिकेय की शक्ति हैं षष्ठी देवी। षष्ठी देवी को देवसेना भी कहा जाता है। 

अर्घ्य के सामान का महत्व

सूप: अर्ध्य में नए बांस से बनी सूप व डाला का प्रयोग किया जाता है। सूप से वंश में वृद्धि होती है और वंश की रक्षा भी। 

ईख: यह आरोग्यता का द्दोतक है। 

ठेकुआ: यह समृद्धि का द्दोतक है। 

मौसमी फल: इस मौसम के फल फलप्राप्ति के द्दोतक हैं।

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