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chandra grahan 2019: चंद्रग्रहण की समाप्ति के बाद खुले मंदिरों के कपाट

lunar eclipse 2019

16 जुलाई की देर रात 01 बजकर 32 मिनट(17 जुलाई) से 04 बजकर 30 मिनट तक के लिए चंद्र ग्रहण रहा। यह आंशिक चंद्र ग्रहण था और इसी के साथ ये साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण भी था। 

तीन घंटे रहा चंद्रग्रहण
आचार्य सुशांत राज ने बताया कि  आषाढ़  शुक्ल पूर्णिमा पर 16 जुलाई को  चंदग्रहण 1:32 मिनट पर शुरु होकर सुबह 4:30 तक रहेगा। ग्रहण की अवधि दो घंटे अठावन मिनट रहेगी। ग्रहण का सूतक काल 16 जुलाई शाम 4:26 से शुरु होकर सुबह 4:45 तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक के समय को अशुभ मूहुर्त माना जाता है।  सूतक ग्रहण समाप्ति के बाद धर्म स्थलों को पवित्र किया जाता है। चंद्र ग्रहण के सूतक काल में मंदिर के पट बंद हो जाते है। इस समय पूजा पाठ करना अशुभ माना जाता है। 

चंद्रग्रहण 2019: 15 से 30 दिनों तक सभी राशियों पर रहेगा चंद्र ग्रहण का असर

बद्रीनाथ केदारनाथ धाम में कपाट मंदिर समिति के अनुसार 16 जुलाई को अपराह्न 4:25 मिनट पर बंद हो जाएंगे। बदरी-केदार मंदिर समिति के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी एवं मीडिया प्रभारी डॉ हरीश गौड़ ने बताया कि इसके लिए अपराह्न 3:15 मिनट पर मंगल आरती होगी। 3:45 बजे भोग और शयन आरती होगी। सूतक काल में सभी प्रकार के दर्शन बंद रहेंगे। बुधवार 17 जुलाई को रात 1 बजकर 31 मिनट से सुबह 4 बजकर 31 मिनट तक 3 घंटे का चंद्रग्रहण है। 17 जुलाई को सुबह 4:40 बजे बदरीनाथ धाम की घंटी बजेगी। सुबह 6 बजे अभिषेक पूजा होगी। बाकि पूजा यथावत चलेगी।

बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी भुवनचन्द्र उनियाल ने बताया कि ग्रहणकाल से 9 घंटे पहले सूतक काल माना जाता है। चन्द्रग्रहण में बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में सूतक के चलते कपाट बंद और खुलने की एक ही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। 17 जुलाई को चन्द्रग्रहण खत्म होने के बाद सुबह बदरी-केदार धाम के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। सूतक के चलते बदरी-केदार मंदिर समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिर बंद रहेंगे।
गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहित एवं गंगोत्री मंदिर समिति सह सचिव राजेश सेमवाल ने बताया कि 16 जुलाई की शाम 3:45 मिनट पर गंगा आरती होगी। ठीक 4 बजे राजभोग लगेगा। इसके बाद 4:10 पर कपाट बंद होंगे। 17 जुलाई की भोर में मंगला आरती 5:45 मिनट पर होगी। इसके बाद ही मंदिर का कपाट सामान्य दर्शनार्थियों के लिए खुलेंगे।

चंद्र ग्रहण का सभी राशियों पर अलग - अलग प्रभाव पड़ेगा। 

गर्भवती महिलाओं पर चंद्र ग्रहण का असर
माना जाता है कि किसी भी ग्रहण असर सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं पर होता है। क्योंकि ग्रहण के वक्त वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा काफी ज्यादा रहती है। ज्योतिषाचार्यों द्वारा ग्रहण काल के दौरान गर्भवती स्त्रियों को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जाती है। बाहर निकलना जरूरी हो तो गर्भ पर चंदन और तुलसी के पत्तों का लेप कर लें। इससे ग्रहण का प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर नहीं होगा। 

ग्रहण काल के दौरान यदि खाना जरूरी हो तो सिर्फ खानपान की उन्हीं वस्तुओं का उपयोग करें जिनमें सूतक लगने से पहले तुलसी पत्र या कुशा डला गया हो। गर्भवती महिलाएं ग्रहण के दौरान चाकू, छुरी, ब्लेड, कैंची जैसी काटने की किसी भी वस्तु का प्रयोग न करें। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे के अंगों पर बुरा असर पड़ सकता है। इस दौरान सुई धागे का प्रयोग भी वर्जित है। ग्रहण काल के दौरान भगवान का नाम लेने के अलावा कोई दूसरा काम न करें

ग्रहण काल में रखें ये सावधानियां -

ग्रहणकाल में प्रकृति में कई तरह की अशुद्ध और हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। इसलिए कई ऐसे कार्य हैं जिन्हें ग्रहण काल के दौरान नहीं किया जाता है।

  • - ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।
  • - ग्रहणकाल में स्नान न करें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें।
  • - ग्रहण को खुली आंखों से न देखें। हालांकि चंद्र ग्रहण देखने से आंखों पर कोई बुरा असर नहीं होता।
  • - ग्रहणकाल के दौरान गुरु प्रदत्त मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।

ध्यान दें- इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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  • Web Title:chandra grahan 2019: 3 hours will be lunar eclipse 9 hours of sutak kaal
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