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3 जून, 2020|11:46|IST

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Chaitra Navratri 2020: चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन होती है मां स्कंदमाता की पूजा

चैत्र नवरात्र का पांचवा दिन रविवार को है। पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। माता को पहली प्रसूता भी कहा जाता है। मां दुर्गा के पंचम स्वरूप को स्कंदमाता के रूप में पूजते हैं।  माता स्कंदमाता शेर पर सवार रहती हैं। उनकी चार भुजाएं हैं। ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प धारण किए हुए हैं। मां का ऐसा स्वरूप भक्तों के लिए कल्याण कारी है। 

कहते हैं कि सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी की पूजा से तेज और कांति की प्राप्ति होती है। वात्सल्य की देवी मां कमल आसान पर विराजमान होकर अपनी चार भुजाओं में से एक में भगवान स्कन्द को गोद लिए हैं। दूसरी व चौथी भुजा में कमल का फूल, तीसरी भुजा से आशीर्वाद दे रही है। इनको इनके पुत्र के नाम से भी पुकारा जाता है।

मां की कृपा से बुद्धि का विकास होता है और ज्ञान का आशीर्वाद मिलता होता है। मां की कृपा से पारिवारिक शांति की प्राप्ति होती है। 
स्कंदमाता की पूजा का श्रेष्ठ समय है दिन का दूसरा पहर। इनकी पूजा चंपा के फूलों से करनी चाहिए। इन्हें मूंग से बने मिष्ठान का भोग लगाएं। श्रृंगार में इन्हें हरे रंग की चूडियां चढ़ानी चाहिए। इनकी उपासना से मंदबुद्धि व्यक्ति को बुद्धि व चेतना प्राप्त होती है, पारिवारिक शांति मिलती है, इनकी कृपा से ही रोगियों को रोगों से मुक्ति मिलती है तथा समस्त व्याधियों का अंत होता है। देवी स्कंदमाता की साधना उन लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ है जिनकी आजीविका का संबंध मैनेजमेंट, वाणिज्य, बैंकिंग अथवा व्यापार से है।

चढ़ावा: मां स्कंदमाता को केले का भोग अति प्रिय है। इसके साथ ही इन्हें केसर डालकर खीर का प्रसाद भी चढ़ाना चाहिए।

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  • Web Title:Chaitra Navratri 2020: Mother Skandamata is worshiped on the fifth day of Chaitra Navratri